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अपना अद्भुत योग

शिमला शर्मा “लक्ष्मी प्रिया”
ग्वालियर (मध्यप्रदेश)

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ऋषि मुनियों की देन है, अपना अद्भुत योग।
इसके नित व्यवहार से, तन- मन हो नीरोग।।

नित अनुलोम-विलोम कर, करिए प्राणायाम।
मिले आत्म परमात्म से, सफल सभी आयाम।

योग करे हर अंग में, प्राणवायु संचार।
करें निरोगी देह को, हरे समस्त विकार।।

स्वस्थ सुभग काया सदा, देती सुखमय भोग।
तन बलिष्ठ मन चुस्त हो, है प्राचीन प्रयोग।।

तन के हरे विकार सब, योग दवा ही जान।
प्राण शक्ति नित ही बढ़े, होता रोग निदान।।

सबको करना चाहिए , प्रातः प्रतिदिन योग।
मन को रखता शांत ये , रखे देह नीरोग।।

मिट जाती है योग से, तन-मन की हर व्याधि।
योग गुरू की साथ में, मिलती मुफ्त उपाधि।।

ध्यान योग करिए सदा, तन- मन रहे निरोग।
योग दिवस शुभकामना, स्वस्थ सुखी हो लोग।

परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा “लक्ष्मी प्रिया”
निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गायन
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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