
छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
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स्त्री और पुरुष
अल्हड़ता और पौरुष
उभय पक्ष का अपभ्रंश
सांसारिक नियमों से
प्रताड़ित पक्ष है : ये किन्नर
आवेग में आक्रोश
करुणा में क्रोध
मातृत्व और पितृत्व से मर्माहत
संतानोत्पत्ति से असक्षम
शिशु प्रेम को लालायित
निसंतान इंसान होते हैं किन्नर
उत्पीड़न आहत नारी मन सा
हतोत्साहित असहाय पुरुष सा
दिशाहीन, परिणाम रहित
उन्मादित मन सा
इश्रुहीन बिलखते दीन मन सा
तन भी भूखा, भूखे मन सा
भीषण भावों के उतार चढाव में
शीत युद्ध मर्यादा से लड़ता
नज़र नज़र से तिरोहित
अपनी लक्ष्मण रेखा में
सिमटे रहते ये किन्नर
स्पंदन रहित संवेदना का मारा
विधी की कृपाहीन कृपा का मारा
ममता से दूर माँ का नयनतारा
कब वीर्यवान पिता ने स्वीकारा
किस्मत कोसता का रब का मारा
ईश्वर की ही खोज है ये बेचारा
स्वयं मन को समझाता
सामाजिक मान्यता को
तरसते ये किन्नर
किसके प्रति जागे निष्ठा
किसका करे वो विश्वास
किसके प्रति रखे आस्था
कहाँ टिकाये अपनी आस
क्या बीत रही इनके मन पर
कैसे समझाये मन की बात
नैसर्गिक जीवन है असमंजस में
कौन जाने कहाँ कुआ कहाँ खाई
कैसे भी, जीवन तो जीना है
किससे मांगे सफाई
इन्हीं भावों के तरणताल में
आजीवन अपना अस्तित्व
खोजते ये किन्नर…!
परिचय :- छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
निवासी : आनंद विहार, दिल्ली
विशेष रूचि : व्यंग्य लेखन, हिन्दी व राजस्थानी में पद्य व गद्य दोनों विधा में लेखन, अब तक पंद्रह पुस्तकों का प्रकाशन, पांच अनुवाद हिंदी से राजस्थानी में प्रकाशित, राजस्थान साहित्य अकादमी (राजस्थान सरकार) द्वारा, पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में नियमित प्रकाशन, राजस्थानी लोक गीतों के लिए प्रसिद्ध कंपनी “वीणा कैसेटस” के दो एलबमों में सात गीत संगीतबद्ध हुये हैं।
सम्मान : “राजस्थानी आगीवान” सम्मान से सम्मानित
श्री गंगानगर के सृजन साहित्य संस्थान का सृजन साहित्य सम्मान व
सरदारशहर गौरव (साहित्य) सम्मान व अनेक अन्य सम्मानरा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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