गुहार लगा रहीं हैं बेटियांँ
रामेश्वर दास भांन
करनाल (हरियाणा)
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देश का परचम लहराने वालीं,
तिरंगे की शान बढ़ाने वालीं,
न्याय-न्याय पुकार रहीं हैं,
बेटियांँ वो कुश्ती में नाम कमाने वालीं,
एक दांव से जो चित कर देतीं,
देश के लिए जो जान झोंक देतीं,
बजवा कर राष्ट्रीय गान देश का,
भारत का गौरव ऊंँचा कर देतीं,
सफ़ेद पोशोकों में छिपे उन भेड़ियों के,
काली करतूतों के किस्से के सुना रहीं हैं,
अपना सम्मान बचाने के खातिर बेटियांँ,
देश चलाने वालों तुमसे गुहार लगा रही हैं,
ए, देश की सत्ता के रहनुमाओं,
कुछ तो शर्म-हया दिखाओ,
जो नारा तुमने दिया देश को,
उस नारे की तो तुम लाज बचाओ
परिचय :- रामेश्वर दास भांन
निवासी : करनाल (हरियाणा)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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