ढ़लान
विश्वनाथ शिरढोणकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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गुस्से में निकल गए
दहलीज़ पार कर गए
जाते-जाते रुक गए
फिर पलट गए
फिर झुक गए
एक पल श्वास लेने ठहर गए !
वेदनाओं में बह गए
भावनाओं में कह गए
जीने के अंदाज बदल गए
इस धारे में जाने कितने बह गए !
जो ऐंठ गए वो टूट गए
जो हार गए वो जीत गए
तुम मुझे क्षमा करों
मैंने तुम्हें माफ़ किया
ऐसा ही कुछ कह गए !!
परिचय : विश्वनाथ शिरढोणकर
मध्य प्रदेश इंदौर निवासी साहित्यकार विश्वनाथ शिरढोणकर का जन्म सन १९४७ में हुआ आपने साहित्य सेवा सन १९६३ से हिंदी में शुरू की। उन दिनों इंदौर से प्रकाशित दैनिक, 'नई दुनिया' में आपके बहुत सारे लेख, कहानियाँ और कविताऍ प्रकाशित हुई। खुद के लेखन के अतिरिक्त उन दिनों मराठी के प्रसिध्द लेखकों, यदुनाथ थत्ते, राजा-राजवाड़े, वि. आ. बुवा, इंद्रायणी सावकार, रमेश मंत्री आदि की रचनाओं का मराठी से किया हुआ हिंदी अनुवाद भी अनेक पत्र-पत्रि...
























