पापा मै भी पढूंगी
दीवान सिंह भुगवाड़े
बड़वानी (मध्यप्रदेश)
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पापा मुझे क्यों नहीं पढ़ाया
अल्पायु मे ही ब्याह कराया
बेटी की उम्र में, मुझे माँ बनाया
दहेज के नाम से भी बहुत सताया।
सत्य-अहिंसा की मै राह चलूँगी
बेड़ियाँ अशिक्षा की मै तोडूंगी
जड़ें भ्रष्टाचार की उखाड़ फेकूंगी
पढ़-लिख कर समाज को सुधारूँगी।
बंधनों को समाज के, तोड़कर पढूंगी
मगर उजियारा समाज में करूँगी
आवाज अन्याय के विरुद्ध उठाउंँगी
खुशियों के पलों का आगाज करूँगी।
उड़ान कल्पना सी मै भी भरूँगी
जुल्मों-सितम से भी लड़ जाऊँगी
वीरांगना समान वीरता दिखाऊंगी
शत्रुओं को भी मै धूल चटाऊंगी।
दिन जब आपके गुजर जायेंगे
उम्र से आप लड़ ना पायेंगे
वारिस आपसे मुकर जायेंगे
सहारा तब मेरा ही, आप पायेंगे।
तन जवाब जब, आपका देगा
बोझ आपको फिर, बेटा समझेगा
पालन तब आपका, मै ही करूँगी
इसलिये पापा मै भी पढूंगी।
परिचय :- दीवान सिंह भुगवाड़े
निवासी : बड़वा...























