मेरी माटी, मेरा देश
नवनीत सेमवाल
सरनौल बड़कोट, उत्तरकाशी, (उत्तराखंड)
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कश्मीर तेरी, कन्याकुमारी तेरी,
उत्तर-दक्षिण सब है तेरा
तिरंगा लहराऊं सबसे पहले
होगा मांगलिक दिन जब तेरा।।
स्वतंत्र यहां अभिव्यक्ति है,
बाईस इसकी शैली हैं,
स्वदेशी पवित्र है लहू तेरा,
धारा विदेशी मैली है।।
माटी है मेरी, देश है मेरा,
अभिमान मेरा, गर्व मेरा,
करते क्यों नहीं जयघोष तेरी
विचार उनसे पूछता हमारा।।
ध्वज संहिता सीखाती हमें,
लहराओ चाहे, चाह जितनी,
ढंग तुम्हारा बताए मान का,
माटी के प्रति श्रद्धा कितनी।।
स्वीकार सबकी पुकार है,
ललकार किसी की स्वीकार्य नहीं,
भारत का दामन उज्ज्वल हो?
प्रश्न यही आज विचार्य है।।
परिचय :- नवनीत सेमवाल
निवास : सरनौल बड़कोट, उत्तरकाशी, (उत्तराखंड)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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