नंदी
श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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शिव है सत्य,
नंदी हैं धर्म नंदी के बिन
शिव अराधना है व्यर्थ
नंदी को हमने छोड़ दिया,
गौ वंशों का संहार किया
भूख प्यास से तड़प तड़प,
सड़कों पर दम तोड़ रहे
ये कैसी पूजा है शिव की
ये कैसे भक्त बने शिव के ???
बछड़ो को अधिकार है जीने का,
नंदी बन पूजे जाने का
कैसे कहलाएंगे सनातनी,
अपनी ही संस्कृति भूल रहे !!
नंदी की विह्वल पुकार सुन,
दिल रोता पल प्रतिपल,
इनके अश्रु विध्वंस बने,
विकराल, प्रचंड, विनाश बने
जो लील रहा है जन-जीवन
ये आँसू वो सैलाब बने!
हे मनुज उठो हे जन जागो,
रोको ये ध्वंस, विनाश, प्रलय,
मानव के भीतर दानव का
अब उठ कर के संहार करो
नव चेतना नव विज्ञान से
संचित करो अनमोल है हैं ये
नंदी ही नंदीश्वर हैं,
यही साधना नील कंठ की,
नंदी ही ना बच पाए जो
कैसे होगा फिर शिव पूजन!!
परि...





















