दौलत कमाने का नशा
संजय जैन
मुंबई (महाराष्ट्र)
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नशा जब दौलत का लग जाये
तो जिंदगी दौड़ने लगती।
सफर फिर जीवन का भी
बिखरने सच में लगता।
समय अभाव का कहकर
निभा नहीं पाते अपना कर्तव्य।
जिसके चलते भूलने लगते
परिवार के सभी अपने भी।।
बड़े धनवान होकर भी
नहीं सम्मान पा पाते।
कभी भी दान धर्म तो
इन्होंने किया ही नहीं।
तो फिर क्यों ये रोते है
मान सम्मान के लिए।
और स्वयं को पता होना चाहिए
की हम नहीं है इसके हकदार।।
न परिवार में मिलते-जुलते
इस तरह के ये लोग।
जिन्हें खुद ही नहीं पता
की घर में क्या कुछ चल रहा।
सुबह से रात तक बस इन्हें
सिर्फ चिंता रहती व्यवसाय की।
और हिसाब-किताब लगाते रहते है
सदा ही फायदा और नुकसान का।।
बड़ा बुरा है ये नशा
जो न सोने देता है।
और न ही अपनों से
ये मिलने देता है।
सभी से एक ही उम्मीद
लगाकर ये बैठे है।
कि किसी भी तरह से
महीने में लाभ ज्...




















