घनघोर घटाएँ
मीना भट्ट "सिद्धार्थ"
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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छाईं हैं घनघोर घटाएँ,
तन-मन को आनंदित कर दे।
अंतस् का तम दूर सभी हो,
जीवन को अनुरंजित कर दे।।
नेह-किरण तेरी मिल जाए,
दुविधा में जीवन है सारा।
मधुरस नैनों से छलका दो,
रातें काली, राही हारा।।
दम घुटता है अँधियारो में,
जीवन पथ को दीपित कर दे।
निठुर काल की छाया जग पे,
मौत सँदेशा पल-पल लाती।
रोते नैना विकल सभी हैं,
क्षणभंगुर काया घबराती।।
विहग-वृंद सब घायल होते,
आस-दीप आलोकित कर दे।
पीर बड़ी है पर्वत से भी,
टूटी सारी है आशाएँ।
क्रंदन करती है ये धरती,
पग-पग पर देखो बाधाएँ।।
डूबी निष्ठाओं की नौका,
प्रेम-बीज को रोपित कर दे।
परिचय :- मीना भट्ट "सिद्धार्थ"
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत...








