मैं एक गरीब किसान हूं
कालूराम अर्जुन सिंह अहिरवार
जगमेरी तह. बैरसिया (भोपाल)
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लघु कथा मैं एक गरीब किसान हूं
कहने को मैं अन्नदाता हूं
मेरे हृदय से पूछो मैं बहुत दुखी हूं
क्या तुम मेरी दर्द वेदना व्यथा को समझ पाओगे
कभी मुझ पर कुदरत का कहर बरस जाता है
कभी सरकार का
मुझे रोता देखकर क्या तुम मेरे
आंसू पहुंच पाओगे
मेरे दुख दर्द में मेरे साथ खड़े होकर मुझे दिलासा दोगे
मैं हूं ना यह कह कर मेरे साथ खड़ा रहोगे
पूरे साल मुझे काम बहुत रहते हैं
मेरे बूढ़े माता-पिता का देखभाल
मेरी जीवन संगिनी की देखभाल
मेरे नन्हे नन्हे छोटे-छोटे बच्चे हैं
साहब
मेरे बच्चे कुपोषित रहते हैं
मैं उन्हें दो वक्त का खाना नहीं खिला पाता
एक बच्चे के विकास के लिए जितना पोषण चाहिए
वह नहीं है मेरे पास
मेरे बच्चों को अच्छे स्कूल में नहीं पढ़ा पाता हूं मैं
उनके स्कूल की फीस नहीं भर पाता हूं मैं
एक उम्र होती है बच्चों की पढ़ने लिखने क...























