सुभद्रा कुमारी चौहान
सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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वीरत्व की ज्वाला से दहकती,
वाणी में था हुंकार,
जन-जन में जागृत करतीं वे,
स्वाधीनता का संचार।
कलम बनी जब शस्त्र उनका,
शब्द बने रणभेरी,
रानी की गाथा गाकर,
भर दी हिम्मत अनेरी।
नारी शक्ति का रूप प्रखर,
साहस जिनका आभूषण,
अंग्रेजी सत्ता से टकराईं,
लेकर स्वाभिमान का वचन।
झांसी की वीरांगना का,
गाया अमर गान,
आज भी गूंजे भारत में,
उनका ओजस्वी सम्मान।
ऐसी वंदनीय कवयित्री को,
शत-शत नमन हमारा,
वीर रस की वह अमिट ज्योति,
जग में रहे उजियारा।
परिचय :- सुषमा शुक्ला
जन्म : 25 अप्रैल
निवास : आबिदजान (अफ्रीका)
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश्वविद्यालय
लेखन विधा : कविता, हायकु, पिरामिड, लघु कथा
लेखन : लेखन के क्षेत्र में कोविद में जीवनसाथी की प्रेरणा से लेखन क...

















