महादेव
सीमा रंगा "इन्द्रा"
जींद (हरियाणा)
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शिव शंभू हितकारी महादेव
जटाओं में समा गंगा गले में रख नाग।
चले विषधारी हरने कष्ट जगत के
अनोखी छवि देखते सभी इनकी।
ना रह पाता अछूता आराधना से इनकी
नाम भोले भंडारी पल में जाते मान।
सावन में बजते ढोल बजाते शंख
पूजन करते शिवलिंग पर नर-नार।
ओंकारेश्वर कष्टनिवारक विषधारी हटते कष्ट
देख ना पाते तड़प लालायित रहते करने मदद।
देखो जरा, लगा भस्म बाबा नंगे पांव
आए हरने कष्ट भक्तों के, संग पार्वती मैया।
विष अपना, रख सर्प, लगा भस्म
उठा डमरू, ले त्रिशूल निकल पड़े नागेश्वर।
परिचय :- सीमा रंगा "इन्द्रा"
निवासी : जींद (हरियाणा)
विशेष : लेखिका कवयित्री व समाजसेविका, कोरोना काल में कविताओं के माध्यम से लोगों टीकाकरण के लिए, बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ हेतु प्रचार, रक्तदान शिविर में भाग लिया।
उपलब्धियां : गोल्डन बुक ऑफ व...






















