जीत की दहाड़
विजय गुप्ता "मुन्ना"
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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घनाक्षरी
बहार खूब जोश की, खेल ट्रिक सुधार से,
मंच अति रोमांच का, जीत से पछाड़ हो।
दस विजय सतत, हार का नहीं सबब,
हर जीत कथा यही, लेश ना जुगाड़ हो।
दशा वक्त अनुरूप, रहे नहीं सदा भूप,
देश जीते विश्व रूप, कुछ ना बिगाड़ हो।
पसीना महक अब, पूरा जग सुरभित,
चाल वही कॉल सही, बॉल मार धाड़ हो।
एक सुर रीत रहे, टीम मन मीत बने,
नायक का रंग ढंग, खोलता किवाड़ है।
उमंग नहीं जंग ही, जीत वाली तरंग से,
जीत जश्न जयघोष, तोड़ता पहाड़ है।
हलचल धड़कन, अटकल दमखम
व्यर्थ नहीं चक चक, आज ही उखाड़ हो।
तन मन हवन से, फतह बल चहल,
विश्व कप में पहल, जीत की दहाड़ हो।
परिचय :- विजय कुमार गुप्ता "मुन्ना"
जन्म : १२ मई १९५६
निवासी : दुर्ग छत्तीसगढ़
उद्योगपति : १९७८ से विजय इंडस्ट्रीज दुर्ग
साहित्य रुचि : १९९७ से काव्य लेखन, तत्कालीन प्रधान मं...
















