वन्दन मातृ शक्ति
मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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ददृ पीकर मत जियो तुम,
ज़हर पी रही हो।
उठो आज, कोई कह रहा है
स्वयंसिद्ध बनकर जियो।
जानता नहीं कोई,
व्यथा व्यक्त किए बिना कोई
चुप रहकर सहना भी दुश्वार है
उठो, कुछ कहो, कुछ सुनो जग की।
जानता है जग, की तुम शक्ति हो
दिव्य हो पर, दैदीप्यमान नहीं
दैदीप्यमान बनकर पान्चजन्य फूंको।
आओ, उठो निराश न हों।
तुम शक्ति कहलाती हो।
कुछ पाषाण खण्डों से
तुम्हारी शक्ति क्षीण न होगी
मै जानती हूं, तुम पाषाणों को
पिघलाने का सामर्थ्य रखती हो
मां धरा जैसी दृढ, सुदृढ़ साहसी बनों
जग में तुम्हारी पहचान बनेगी, मातृ-शक्ति।
परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ ...


















