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पद्य

जान पाओगे
कविता

जान पाओगे

संजय जैन मुंबई (महाराष्ट्र) ******************** नदी किनारे बैठकर देख रहा पानी को। उछल कूद करते हुए बहता जा रहा वो। देख दृश्य यह मानव समझ नहीं पा रहा। फिर भी अपने मन को क्यों विचला रहा।। आया जो भी यहाँ जाना उसे पड़ेगा। विधाता के चक्रव्यहू से उसे गुजरना पड़ेगा। भेद सके इसे तो खुशियाँ बहुत पाओगें। और उलझ गये इसमें तो बहुत दुख पाओगें।। खुद को जिंदा रखने कुछ तो तुम करोगें। फिर अपनी करनी का खुद फल पाओगें। और मानव मूल्यों को तुम समझ पाओगें। और अपने जन्म को स्वयं जान पाओगें।। परिचय :- बीना (मध्यप्रदेश) के निवासी संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं। करीब २५ वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच (hindirakshak.com) सहित बहुत सारे अखबारों-पत्...
आसार
कविता

आसार

राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** नफ़रत सोच समझकर करना मोहब्बत होने के आसार होते हैं। बात सोच समझकर करना इश्क से सब नासार होते हैं। दिल की बात सोच समझकर करना अपनों में भी कई गद्दार होते हैं। हमराही को हमसफर सोच समझकर बनाना धोखा मिलने के आसार होते हैं। परिचय :- राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां...
यूँ ही मुझसे बात करती हो
ग़ज़ल

यूँ ही मुझसे बात करती हो

सरला मेहता इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** यूँ ही मुझसे बात करती हो भोर की रोशनी निराली है सुबह की ये हसीन लाली है जब गए छोड़कर अकेली तो ज़िन्दगी राम ने संभाली है साज सजने लगे जमी महफिल ये मेरा दिल तो आज खाली है सायबा आपने जुदा होकर क्यूँ बनाया मुझे रुदाली है घोर फांके पड़े गरीबों में ये महल में सजी दिवाली है कह न पाई तुझे कहानी मैं शर्म की आँख पे ये जाली है मान मुझको नहीं पराया सा देख दिल में जगह बना ली है भूलकर भी कभी नहीं आया याद कर मैं वही घरवाली है खाइए जी ज़रा नफ़ासत से रोटियाँ ये सभी रुमाली हैं कम न समझो हमें जगतवालों हम हैं दुर्गा हमीं तो काली हैं राजरानी लगूँ सभी को मैं लग रहा तू बड़ा मवाली है फूल कलियों सजा ये कुनबा है बाग का तो पिता ही माली है क्यूँ ये दुल्हे दिखा रहे नखरे दुलहिने तो देखी भाली है दाल बाटी व चूरमा ल...
मिट्टी के दीप सजाओ
कविता

मिट्टी के दीप सजाओ

राम रतन श्रीवास बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ******************** चाहता हूंँ सबके घर दीप जले, पर मेरे घर भी दीप जलाओ। इस मिट्टी के दीप बने जो, तुम अपने घर में सजाओ।। कितनी मेहनत से हमने, मिट्टी रौंदा चाक घुमाया। तपती धूप जली अंगारा, तन-मन हमने झुलसाया।। दीपक के न मोल लगाओ, पर मेरे घर भी दीप जलाओ। ममता भरी कहानी कहती, बेटी तुम मिट्टी के दीप बनाओ।। कुबेर घरों में सजेंगे लड़ियां, चका-चौंध की है दुनिया। इस मिट्टी के मोल हैं क्या, कहती है ये सारी दुनिया।। इसकी शुद्धता जो जाने, रोग रहित परिवेश हो मानें। आर्यावर्त संस्कृति दिखे, इस मिट्टी के दीप से मानें।। धर्म परंपरा में दिखे विज्ञान, दीपोत्सव में छुपे ज्ञान से। कहे कवि "राधे" मनसे, मिट्टी के दीप जलाओ मनसे।। चाहता हूंँ सबके घर दीप जले, पर मेरे घर भी दीप जलाओ। इस मिट्टी के दीप बने जो, तुम अपने घर में सजाओ।। पर...
बाल-विवाह
कविता

बाल-विवाह

रामेश्वर दास भांन करनाल (हरियाणा) ******************** बाल-विवाह है सामाजिक कुरीति, जड़ से इसे हमें मिटाना है, जला कर मशाल गांव-शहर में, सबको जागरूक बनाना है, बच्चियों के जीवन से, खिलवाड़ यहांँ पर होता है, छोटी उम्र में शादी के कारण, शारीरिक, मानसिक शोषण होता है, थे खेलने- पढ़ने के दिन जिनके, लाचार बना कर अब छोड़ा है, कम उम्र में कर शादी कर, बीमार बना कर छोड़ा है, अनगिनत लड़कियां यों ही, बेमौत ही मारी जाती है, है अभिशाप बाल- विवाह, इसकी भट्टी में जल जाती है, उठो जागो ए माताओं- बहनों, जागो मेरे देश के युवाओं, देश में अब अलख जगानी है, बाल -विवाह ना हो भारत में, इस पर मिलकर रोक लगानी है, लेकर दीये -मशाल हाथ में, संदेश घर-घर फैला दो, बाल- विवाह ना हो भारत में, इस पर अब रोक लगा दो परिचय :-  रामेश्वर दास भांन निवासी : करनाल (हरियाणा) घोषणा पत्र : मैं यह प्...
स्वयं की व्याकुलता
कविता

स्वयं की व्याकुलता

संजय जैन मुंबई (महाराष्ट्र) ******************** सोच सोच कर मन व्याकुल कितना हो गया। भेजा जिसने मुझको क्या वो ही पालेगा? प्रश्न बहुत जटिल है पर हल करना होगा। इसलिए विश्वास हमें उस पर रखना होगा।। बैठ दुनियाँ के मंच पर देख रहा दुनियाँ को। क्या क्या तेरे सामने आज कल हो रहा है? फिर भी मन तेरा नहीं पिघल रहा है। और खुद को तू मानव कैसे कह रहा?? बदलो खुद को तुम, तो दुनियाँ भी बदलेगी। जो कुछ तुम कहते हो खुदको करना होगा। देखेगा जो तुम को वो भी निश्चित बदलेगा। देखते ही देखते हमारा ये समाज बदलेगा।। परिभाषा मानव की क्या कोई समझायेगा? मानव का मानव से रिश्ता जोड़ पायेगा। या खुद ही इस प्रश्न का उत्तर बन जायेगा। तब जाकर शायद तू मानव परिभाषा बता पायेगा।। परिचय :- बीना (मध्यप्रदेश) के निवासी संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं। करीब २५ वर्ष से ...
तू शरद के चांद जैसी
कविता

तू शरद के चांद जैसी

शिव चौहान शिव रतलाम (मध्यप्रदेश) ******************** तू नदी की अविरल धारा मैं उथला-सा पोखर हूं तू प्रेम की क्लिष्ट भाषा मैं सरल-सी बोली हूं तू नयन में सपने बुनती मैं हकीक़त दर्पण हूं तू गगन में उड़ती रहती मैं पगडंडी विचरण हूं तू शरद के चांद जैसी मैं ग्रह में मंगल हूं तू प्रेम गंध महके जैसे मैं पसीने तर-तर हूं तू अनुराग है गीत भ्रमर-सी मैं कबीर की वाणी हूं। परिचय :-  शिव चौहान शिव निवासी : रतलाम (मध्यप्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कव...
दीपोत्सव
कविता

दीपोत्सव

डॉ. अवधेश कुमार "अवध" भानगढ़, गुवाहाटी, (असम) ******************** किसी जगह पर दीप जले अरु कहीं अँधेरी रातें हों । नहीं दिवाली पूर्ण बनेगी, अगर भेद की बातें हों ।। ऐसे व्यंजन नहीं चाहिए, हक हो जिसमें औरों का । ऐसी नीति महानाशक है, नाश करे जो गैरों का ।। हम तो पंचशील अनुयायी, सबके सुख में जीते हैं । अगर प्रेम से मिले जहर भी, हँस करके ही पीेते हैं ।। चूल्हा जले पड़ोसी के घर, तब हम मोद मनाते हैं । श्मशान तक कंधा देकर, अन्तिम साथ निभाते हैं ।। किन्तु चोट हो स्वाभिमान पर, जिन्दा कभी ना छोड़ेंगे । दीप जलाकर किया उजाला, राख बनाकर छोड़ेंगे ।। दीपोत्सव का मतलब तो यह, सबके घर खुशहाली हो । दीन दुखी निर्बल के घर भी, भूख मिटाती थाली हो ।। प्रथम दीप के प्रथम रश्मि की, कसम सभी जन खायेंगे । दीप जलाकर सबके घर में, अपना दीप जलायेंगे ।। घर घर में जयकारा गूँजे, कण कण में खु...
भारत को सोने की चिड़िया बनानां हैं
कविता

भारत को सोने की चिड़िया बनानां हैं

किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया (महाराष्ट्र) ******************** भारत को सोने की चिड़िया बनानां हैं भ्रष्टाचार को रोककर सुशासन को आखरी छोर तक ले जाना हैं हृदय में ऐसा जज्बा लाना है सरकारों को ऐसी नीतियां बनाना हैं साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाना हैं संकल्प लेकर सुशासन को आखिरी छोर तक ले जाना हैं भारत को परिवर्तनकारी पथ पर ले जाना हैं सबको परिवर्तन का सक्रिय धारक बनाना हैं न्यूनतम सरकार अधिकतम शासन प्रणाली लाना हैं सुशासन को आखिरी छोर तक ले जाना हैं भारतीय लोक प्रशासन को ऐसी नीतियां बनाना हैं वितरण प्रणाली में भेदभाव क्षमता अंतराल को दूर करना हैं लोगों के जीवन की गुणवत्ता कौशलता विकास में सुधार करके सुखी आरामदायक बेहतर ख़ूबसूरत जीवन बनाना हैं सुविधाओं समस्यायों समाधानों की खाई पाटना हैं आम जनता की सुविधाओं को अधनुतिक तकनीकी से बढ़ाना हैं ...
करवा चौथ
कविता

करवा चौथ

संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया भोपाल (मध्यप्रदेश) ******************** आई-आई करवा चौथ आई। संग चौथ माता आशीष देने आई। मैं तो चौथ माता से वरदान मांगू। अखंड सौभाग्य का। मैं तो चौथ माता की पूजन अर्चन करूं। मस्तक झुका अपना सर्वस्व अर्पण करूं। अपनी झोली वरदानो से भर पूर्ण करूं। मैं तो चौथ माता से वरदान मांगू। अखंड सौभाग्य का। मैं तो करवा चौथ पर सोलह सिंगार कर। सर्वस्व समर्पण कर सच्चे हृदय से वंदन करूं। चौथ माता को रिझाऊं अरू प्रसन्न। करने का प्रयत्न सर्वस्व करूं। मैं तो पति के दीर्घायु होने के लिए। निर्जला व्रत रखूं। रात्रि चंद्रोदय होने पर चंद्र को अधर्य दूं। पति को रोली, चंदन, अक्षत, टीका लगा वंदन करूं। पति से आशीष पाऊं। अरू पति नाम का टीका, सिंदूर, महावर, मेहंदी, बिंदी लगाऊं। पायल, बिछिया, चूड़ियां पति। नाम की पहनूं। सदा पहनने का आशीष पाऊं। ...
करवा चौथ का व्रत
कविता

करवा चौथ का व्रत

डॉ. सुभाष कुमार नौहवार मोदीपुरम, मेरठ (उत्तर प्रदेश) ******************** आज करवा चौथ का व्रत था, भुला दिया हो उसने सब कुछ, पर मुझे वो क्षण याद था। वो उसका फोन- “हेलो ! कैसे हो तुम? मैं बिलकुल ठीक हूँ। मेरी आवाज को सुनकर तुम दुखी मत होना, याद करके मेरी, अपने आप को मत खोना, आज करवा चौथ का व्रत है! तुम्हारी आवाज सुनानी थी, माँग कर मन्नत माँ से, अपनी तक़दीर बुननी थी। किसी को कुछ नहीं पता ! सुबह से पानी भी नहीं पिया है। तुम्हें पाने का सुरूर मेरी आत्मा में घुल गया है। अच्छा ! मम्मी आती है फोन रखती हूँ, बसाकर मनमंदिर में तुम्हारे लिए दुआ करती हूँ। पर अब!!!! फोन की घंटी नहीं बजती !! और तुम्हारी कोई उम्मीद अब मेरे लिए नहीं जगती। लेकिन मेरे कानों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है, तुमने न सही, मैंने छलनी से चाँद देखा था। कहीं नहीं था चाँद! छलनी के हर छेड़ से तुम्हें द...
उजाड़ दिये हैं बहुत सारे घर इस शराब ने
कविता

उजाड़ दिये हैं बहुत सारे घर इस शराब ने

रामेश्वर दास भांन करनाल (हरियाणा) ******************** उजाड़ दिये हैं बहुत सारे घर इस शराब ने मयखानों में खो गई  है जिंदगी अब तो उसकी, लाखों की पी गया जो अब तक शराब वो यहांँ, आता है हर रोज़ शराब के नशे में घर अपने वो, बच्चे- पत्नी रहते हैं डर के  साये में उसके यहांँ, खुद का  होश  ना उसे पता अपने शरीर का, लड़खड़ाते कदमों से चला आता है वो यहांँ, रहने को ढंग का घर नहीं बनाया उसने अब तक, फिर भी नशें से  दिल लगाता है वो हर दिन यहांँ, बना ना सका बच्चों के नहाने,शौच की जगह वो, बस पीने का ही ख़्याल  रहता है उसको तो यहांँ, जिंदगी नर्क बना ली अपनी व बच्चों की उसने, संगती में  रख रखे हैं  अपने जैसे दो- चार यहांँ, उजाड़  दिये  है  बहुत  सारे घर इस शराब ने, देखता है वो हर तरफ ना सोचता अपने बारे में यहांँ परिचय :-  रामेश्वर दास भांन निवासी : करनाल (हरियाणा) घो...
गोद
कविता

गोद

डॉ. किरन अवस्थी मिनियापोलिसम (अमेरिका) ******************** गोद सा सुंदर नहीं बिछौना, नहीं गोद सी आसंदी गोदी मात-पिता या प्रभु की, गोद सी न्यारी नहीं स्थिति नहीं गोद सी रक्षित डाली, गोद की नरमी सदा निराली निश्चिन्त भाव से लेटा बालक, करे किलोलें, माँ मतवाली गोद की महिमा उसकी अपनी, गोद की गरिमा उसकी अपनी गोद का हक़ भी उसका अपना, गोद का ऋण भी उसका अपना गोदी का सुख सबने पाया, कोटि जन्म लेकर वो आया पर गोदी का ऋण, उतार नहीं कोई पाया गोदी ने ध्रुव को दी छाया, उसे प्रभु की गोद बिठाया रक्षक बनी गोद होलिका की, जिसने प्रह्लाद बचाया नरसिंहप्रभु की गोदी में, मोक्ष हिरणकश्यपु ने पाया सम्मान गोद ने जग में, स्थान राजपद का भी पाया गोदी का मर्म शिशु ही जाने, उसकी ममता वो पहचाने उसकी गरमाहट बल उसका, खेल करे जाने अनजाने गोद का आसन बड़ा हि प्यारा, इसके नेह में डूबा ज...
पुरानी बातें
कविता

पुरानी बातें

आकाश सेमवाल ऋषिकेश (उत्तराखंड) ******************** कागज़ के एक टुकड़े पर, कुछ लिखी पुरानी बातें हैं। जो स्वर्णिम आखर सी अंकित, नटखटी-नटखटी यादें हैं। जिसमें है उल्लेख वही। अखियां जिसमें देख वही। उस से ही, आखर, शब्द बना, हाँ-हाँ, पूरा है आलेख वही। उसका रूठा, उसका पूछा, वो हंसती, गाती रातें हैं। कागज़ के एक टुकड़े पर, कुछ लिखी पुरानी बातें हैं। उसकी हया, अदाएं हैं। वो फूल सी नाज़ुक बांहें हैं। वो नज़्म मोहब्बती गानों का, जो मिलकर गुन-गुनाएं है। वो चुपके-चुपके मिलने का, अधुरी मुलाकातें हैं।। कागज़ के एक टुकड़े पर, कुछ लिखी पुरानी बातें हैं। परिचय :- आकाश सेमवाल पिता : नत्थीलाल सेमवाल माता : हर्षपति देवी निवास : ऋषिकेश (उत्तराखंड) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। ...
जब सजन देख फिर शृंगार होगा
गीत

जब सजन देख फिर शृंगार होगा

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** २१२२ २१२२ २१२२ २१२२ चाँद निकलेगा सजन जब देख फिर शृंगार होगा। व्रत रखे साजन सुहागन साथ तो भरतार होगा।। उम्र लंबी हो सजन की नित्य करती कामना है। माँगती वरदान प्रभु से वामिनी सुख साधना है।। देख करवाचौथ को पूजा करूँ मन मीत आजा। गंग सी बहती चलूँ अब संग गाती गीत राजा।। ओट चलनी देखती जिसको वही तो प्यार होगा। सात जन्मों का निराला संग अपना मान प्रियतम। है खनक चूड़ी झनक पायल सुनाती नित्य सरगम।। नाक की नथनी कहे साजन सदा ही ध्यान देगा। आज करवा चौथ को चंदा कहे प्रिय मान देगा राम सिय जोड़ी रहे सुंदर सजन संसार होगा। बन चकोरी राह तकती ये सुहागन देख तेरा। प्रीत का हिय है बसेरा चाँद सीमा पार मेरा।। अर्ध्य देती चाँद को वंदन करूँ प्रिय प्रेम पलता। चन्द्र ले जा आज पाती दिव्य दीपक प्रेम जलता।। डोर पावन प्रेम की पनप...
करवाचौथ का चाँद
स्तुति

करवाचौथ का चाँद

डॉ. अर्चना मिश्रा दिल्ली ******************** यूँ तो तुम रोज़ मेरी मुँडेर पर आकर दस्तक देते हो रोज़ तुमसे ढेरों बातें भी होती हैं। पर आज की बात कुछ ख़ास है आज मेरा भी रंग तुम्हारे जैसा दमका है तुम्हारी शुभ्रता में खो जाने को जी चाहता है आज तुम्हारा इंतज़ार कुछ ख़ास है आज तुम मेरे प्रियतम सखा नहीं हो आज तुम चंद्र देव हो जिनसे मैं ढेरों, दुआएँ और आशीर्वाद चाहती हूं, अपने जीवन में आ रही सारी परेशानियों का जवाब चाहती हूँ जोड़ा मेरा अमर रहे, ऐसा आशीर्वचन बेहिसाब चाहती हूँ तुम्हारी शीतलता में खुद भी शीतल होना चाहती हूँ आज पिय के संग तुम्हारा दीदार करूँगी हाथ जोड़, पुष्प अर्पित कर आज तुम्हें प्रसन करूँगी। जन्मो जन्मांतर रहे पिय का साथ ऐसा वचन चाहती हूँ रूप रंग दमके, फूलवारी रहे सलामत मेरी चेहरे पर ना आने पाए धूमिलता ऐसा प्रतिदिन चाहती हूँ। ये जो करवाचौथ...
एकता में शक्ति है
कविता

एकता में शक्ति है

अंजनी कुमार चतुर्वेदी निवाड़ी (मध्य प्रदेश) ******************** सदा संगठन में जो रहते, ताकतवर हो जाते। चूहे अगर एक हो जायें, बिल्ली को धमकाते। आधी सदा एक की ताकत, दो की होती चार गुना। मिल जाते दस बीस साथ में, होती तभी हजार गुना। एक अकेला थक जाएगा, मिलकर हाथ बढ़ायें। जो दुर्बल हैं उन्हें सहारा, देकर शिखर चढ़ायें। करें एकता का जो पोषण, उनको कौन डराता। ताकतवर दुश्मन भी उनको, कभी हरा ना पाता। जब भी कोइ अकेला होता, साहस घट जाता है। जैसे कोइ अकेला कागज, झट से फट जाता है। बूंदें भी नदिया में बहकर, हैं सागर बन जाती । फसीं, जाल में मिलकर, चिड़ियाँ, जाल सहित उड़ जातीं। हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, सब इस की संताने। बन जाते भारत की ताकत, सारी दुनिया जाने। रहें एकता में सब मिलकर, हिंदुस्तान हमारा। गर्व करें अपने भारत पर, है प्राणों से प्यारा। परिचय :...
जीवन संरक्षण
कविता

जीवन संरक्षण

अर्चना अनुपम जबलपुर मध्यप्रदेश ******************** ये अविष्कार या फिर विकार? सुविधा में कितनी दुविधा है। संचार दूर, संग्राम बिना क्यों? तड़प मर रही चिड़िया हैं?? ये जितना बढ़ता जाएगा उतना कोहराम मचाएगा.. अभी पक्षी मगर कल मानव भी इसका शिकार बन जाएगा। विष कम हो या फिर ज्यादा हो पर असर अवश्य दिखाएगा जीवों के जीवन से खेला इंसान सजा तो पाएगा.... ये 4जी, 5जी बन्द करो जीने दो उनको जीने दो सुन्दर सृष्टि की मधुर छटा का जीवन अमृत पीने दो.... आख़िर क्यों उनसे छिनी जा रही प्रेम-दया की छैयां है? चुन-चुन दाना नहीं खिलाती दिखती नहीं गौरैया है? निर्दोष तुम्हारा क्या लेते?? बस कलवर गान सुनाते हैं वनस्पति के बीज भूमि पर पक्षी मित्र बिखराते हैं... कर्जदार तो नहीं हैं वो जो देकर जान चुकाते हैं... मासूम दण्ड किस बात वो अब मृत्युदण्ड से पाते हैं?? परिचय :- अर्चना पाण्ड...
दो चाँद उतरे मेरे अंगने
कविता

दो चाँद उतरे मेरे अंगने

सरला मेहता इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** आज दो चाँद उतरेंगे मेरे अंगने शारदीय सुधा बरसने की बेला करवाचौथ की मैं बाट जोहूँ अंगना सजाऊँ व चौक पुराऊँ सखियाँ बुलाऊँ, बधाई बटाऊँ महावर लगाऊँ मैं मेहँदी रचाऊ लाल चूनर में अब सितारे जड़ाऊँ घेरदार लहंगा नई चोली मँगाऊँ टीको बिंदी नथनी झुमके मंगाऊँ मंगलसूत्र में मेरे हीरे मोती जड़ाऊँ सोने के भुजबंद करधूनि लटकाऊँ गोरे गोरे हाथों में चूड़ियाँ खनकाऊँ मुंदरी पे बलमा का नाम लिखाऊँ रुनझुन पायल बिछिया झमकाऊँ ऊँची अटारी पर बैठके इतराऊँ इंद्रधनुषी करवे माटी के मंगाऊँ मेवा बतासा से पूरे ही भराऊँ चाँदी की चलन खूब सजाऊँ हलवा पूरी भोग थाल सजाऊँ निर्जल रह पी की उमर बढ़ाऊँ सौलह श्रृंगार कर वारी जाऊँ हँसी ठिठौली, घड़ियाँ बिताऊँ साजन के रंग में मैं रंग जाऊँ पूजन थाल मगन हो सजाऊँ दीए में प्रेम की बाती जलाऊँ चलनी में पि...
सदा सुहागन रहो
कविता

सदा सुहागन रहो

सीमा रंगा "इन्द्रा" जींद (हरियाणा) ******************** रहो सुहागन बहनों तुम देते रहे आशीष सभी तुम्हें भर के मांग, लगा के बिंदी लगा के टीका, लगा के मेहंदी पहन के नथ, पहन के बिछिया छनका के पायल, बजा के कंगना नैनो में लगा काजल, कर सोलह श्रृंगार रख व्रत करवा का, पति की खातिर सुन कहानी, करके दान-दक्षिणा शिव-पार्वती की कर पूजा करके नमन बड़ों को, ले आशीष उनसे सदा सुहागन का, पति की लंबी उम्र रहो सदा सुहागन बहनों तुम देते रहे से सभी आशीष तुम्हें परिचय :-  सीमा रंगा "इन्द्रा" निवासी :  जींद (हरियाणा) विशेष : लेखिका कवयित्री व समाजसेविका, कोरोना काल में कविताओं के माध्यम से लोगों टीकाकरण के लिए, बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ हेतु प्रचार, रक्तदान शिविर में भाग लिया। उपलब्धियां : गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से प्रशंसा पत्र, दैनिक भास्कर से रक्तदान प्रशंसा पत्र, सावित्...
भाव की अभिव्यंजना
गीत

भाव की अभिव्यंजना

राम कुमार प्रजापति "साथी" जतारा, टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) ******************** भाव की अभिव्यंजना होती अलंकृत, सप्त स्वर नव रस भरे उर तार झंकृत। भव्यता की दिव्यता दिनमान हिंदी। शुभ सदन शौभाग्यशाली शान हिंदी। वर्ण बावन वृह्म मुख से उच्चरित। बृक्ष बट के पात सम शुभ पल्लवित। सौम्यता सामर्थ्य सत पथ संचलन, वेद महिमा गा रहे मन स्फुटित। छन्द सलिला गीत गंगा सौम्य संगम, हिन्द हिन्दू हर्ष हिदुस्तान हिंदी। शुभ सदन शौभाग्यशाली शान हिंदी। व्याकरण की शुद्धता उर में लियेहै। गीत गाये भारती हुलषे हिये है। जन्म से जीवन बनी आदर्श प्रिय तुम, प्राण हिंदी प्रीत पट समरस किये है। ध्यान चिंतन खोज की पावन नसेनी, तर्क से अनुबंध कर विज्ञान हिंदी। शुभ सदन शौभाग्यशाली शान हिंदी। मातृभाषा मन मृदुल मोहित अधर अस। राष्ट्र भाषा के लिए अब हो समर बस। आइए मिल सब लड़ें यह जंग दुर्लभ, आज से ही लीज...
यूँ ना बदला करो
कविता

यूँ ना बदला करो

डॉ. दीपा कैमवाल दिल्ली ******************** मौसम की तरह आप यूँ ना बदला करो आ जाओ लौटकर अब यूँ ज़िद्द ना करो।। हो रही देर अब यूँ न रुसवा करो मुँह से कुछ तो कहो चाहे शिक़वा करो। मुखातिब हूँ मैं तेरी मजबूरियों से ना चाहकर भी हैं दरमियाँ जो उन दूरियों से। काली ज़ुल्फ़ों में बिखर आई है अब चांदनी जाने से पहले हाले बयां कुछ करो। दे जाए सुकूं ऐसा कुछ तो कहो आती-जाती सांसों से छल अब ना करो। इम्तिहां हो गयी अब तो आके मिलो दिल-ए-नाचीज़ से आज कुछ तो कहो। जो दिया था कभी तुम्हे वक़्त उसकी कद्र कुछ तो करो मौसम की तरह यूँ ना बदला करो..... छोड़ो जाओ हमे बात करनी नहीं आपका होना नहीं आपमें जीना नहीं अब मुलाक़ात की आरज़ू करनी नहीं। है बदल जो गया उसमें खोना नहीं उसमें जीना नहीं उसमें मरना नहीं भूलकर भी उसे याद करना नहीं। प्रेम पर लिख दिए चं...
दिल चाहता है
कविता

दिल चाहता है

देवप्रसाद पात्रे मुंगेली (छत्तीसगढ़) ******************** वक्त है जीवन संघर्ष का, हर हाल में साथ दूँ। कदम बढ़ा के आगे, तेरे हाथों में हाथ दूँ।। दिल चाहता है.... चाहे पीता रहूँ दर्द का घूँट, चाहे हो पीड़ा घनीभूत।। हरपल देखूँ तेरी मुस्कराता चेहरा, मेरी हर धड़कन में हो तेरा पहरा दिल चाहता है... तू चले कहीं तो बनके साया तेरे साथ चलूँ। रंग जाऊँ तेरे रंग में, लेके हाथों में हाथ चलूँ।। दिल चाहता है... तू छूले बुलंदी आसमां की, तुम्हें थामने तेरे पास रहूँ। सुन ले आवाज दिल की, तुझमें बनके एहसास रहूँ।। दिल चाहता है.. तेरी हर फिक्र की फिक्र करूं, तेरी उलझनों से वाकिफ रहूँ। तेरी हर दर्द को सीने से लगा, हर गम का बोझ सहता रहूँ।। दिल चाहता है... परिचय :  देवप्रसाद पात्रे निवासी : मुंगेली, (छत्तीसगढ़) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह र...
स्पर्धा
कविता

स्पर्धा

दीप्ता नीमा इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** हर कोई शख्स अपनों से स्पर्धा कर रहा है, सुकून छोड़ चिंता से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। जिंदगी की दौड़ में आगे निकल जाऊं, कमाने की होड़ में सबको पीछे छोड़ आऊं, स्वयं आगे हो कैसे उसे पीछे खींच लाउं।। कमाल है ना , हर कोई शख्स अपनों से स्पर्धा कर रहा है। ये सारी दुनिया बहुत सतरंगी है जनाब, सभी अपनों ने पहने हुए हैं बेहिसाब नकाब, आप नहीं कर सकते उनसे सवाल जवाब, कमाल है ना, हर कोई शख्स अपनों से स्पर्धा कर रहा है। आप शामिल हो गए अनभिज्ञ किसी स्पर्धा में, पता न चलेगा रहोगे अनजान इसी दुविधा में, प्रतिस्पर्धी बन जाओगे अनचाही प्रतिस्पर्धा में, कमाल है ना, हर कोई शख्स अपनों से स्पर्धा कर रहा है, सुकून छोड़ चिंता से प्रतिस्पर्धा कर रहा है।। परिचय :- दीप्ता मनोज नीमा निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्...
शरद पूर्णिमा
दोहा

शरद पूर्णिमा

कीर्ति मेहता "कोमल" इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** षोडश कल युत चंद्रमा, दिये सुधा सौगात। युगल रचाते रास हैं, शरद पुर्णिमा रात।। शरद पूर्णिमा यामिनी, करें बिहारी रास। राधा घट की स्वामिनी, सोहे दोनों पास।। शरद धवल है चंद्रमा, रजनी पूनम आज। सज्जित षोडश है कला, सुधा सरस है साज।। चन्द्र किरण कोजागिरी, दोष मुक्त सब लोग। भोग प्रसादी खीर का, काया रहे निरोग।। चन्द्र प्रभा शीतल लगे, शरद रहा है साक्ष्य। ताप घटेगा सूर्य का, जाड़ा बनता लक्ष्य।। परिचय :- कीर्ति मेहता "कोमल" निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बीए संस्कृत, एम ए हिंदी साहित्य लेखन विधा : गद्य और पद्य की सभी विधाओं में समान रूप से लेखन रचना प्रकाशन : साहित्यिक पत्रिकाओं में, कविता, कहानी, लघुकथा, गीत, ग़ज़ल आदि का प्रकाशन, आकाशवाणी से प्रसारण। प्राप्त सम्मान : अभिव्यक्ति विचार मंच नागदा से अ...