मुस्कान
निरूपमा त्रिवेदी
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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प्रिये ! मधुर मधु-सी तुम्हारी मुस्कान
सजाने लगी आकर अधरन बंधनवार
स्मृति विथियों से ध्वनित तुम्हारी पदचाप
हृदय बसी छवि ले आई यादों का मधुमास
जूही-सी सुकुमार कली चंपे सी सुवास
तन-मन महका गई महकी-सी हर सांस
हिय हिलोर नित-नित निहारन की आस
सांझ सवेरे रहती हरदम दिल के पास
मैं तितलि अजान-सी तुम भ्रमर बन गाते गान
फूल-फूल मंडराते हम दिखलाते अपना मान
सुमन रस पगी तुम्हारी कोमल सुरभित गात
उपवन खिल उठता था मानो पाकर हमारा साथ
तरु-तरु शाख-शाख थी झूमती-सी
डोलती अल्हड़ समीर मस्ती में मस्त सी
हर्षित हो बरसाती थी अपने झर-झर पात
प्रिये!! तुम संग मधुर मिलन फिर आया याद
परिचय :- निरूपमा त्रिवेदी
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना,...
























