मनमीत
रुचिता नीमा
इंदौर (मध्य प्रदेश)
********************
हर पल साथ हो तुम,
हमेशा मेरे पास हो,
कैसे कहू कि तुम एक
खूबसूरत अहसास हो।
अतृप्त से मन को तुम प्रेम का
पावन दरिया जो पास हो,
डूबकर भी जो न बुझे,
वो अधूरी सी प्यास हो।।
तिमिर को जो दूर करे,
वो मन का रोशन चिराग हो।।
कह नही सकती क्या हो तुम
मेरे लिये, मगर सबसे खास हो।।
मनमीत कहु या प्रीतम तुम्हें,
हर बन्धन तुमसे आबाद हो।।
जन्मों जन्मों का मेरे,
तुम पुण्यों का उजास हो।।
इस दिल की तमन्नाओं का
तुम ही आखिरी पड़ाव हो।
पाकर तुम्हें मुक़म्मल हुए हम,
इस जिंदगी का अलौकिक प्रकाश हो।।
कहने को तो मनमीत हो, पर
ईश्वर का दिया खूबसूरत उपहार हो।।
यही दुआ है दिल से, हमेशा मेरे
हाथों में बस तुम्हारा हाथ हो।।
परिचय :- रुचिता नीमा जन्म २ जुलाई १९८२ आप एक कुशल ग्रहणी हैं, कविता लेखन व सोशल वर्क में आपकी गहरी रूचि है ...

























