तुझे क्या लिखूँ
मधु टाक
इंदौर मध्य प्रदेश
********************
कलम जब करिश्मा करती है और शब्द नृत्य करने लगते हैं तब कविता का सृजन होता है कविता अन्तर मन में की गई वो थपकी है जो रूह को सुकून देती है !!!!
हूँ मैं कश्मकश में कविता तुझे किया लिखूँ
समंदर में बहती हुई सरिता तुझे क्या लिखूँ
गुलशन में आज़ाद पक्षियों की चहचहाहट लिखूँ
पिंजरे में क़ैद इन परिन्दों की छटपटाहट लिखूँ
शजर से झरते इन पत्तों का गरल वियोग लिखूँ
नई कोंपलों के उदय का सुहाना सुयोग लिखूँ
इठलाते समंदर के खारेपन का अभिशाप लिखूँ
दरिया का सिन्धुराज से मिलने का मिलाप लिखूँ
सूरज की तपिश से तपती धरती की व्यथा लिखूँ
सावन से भीगी इस धरा की उन्मुक्त गाथा लिखूँ
उसकी ख़ुशबू से महकता दिल का गुलशन लिखूँ
उसके न होने से वीरान होता मन का उपवन लिखूँ
डूबती हुई इस शाम का धुंधला सा प्रकाश लिखूँ
उगते सूरज का *मधु* सिन्दूरी सा उल...
























