सांझ
मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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इतनी न फूलो
सन्ध्या रानी कि
तम तुम्हारा
ॴचल छीन ले
इतना सुनहरापन
न बिखेरो कि
रात की काली चुनरी
में किनारी लगो।
इतना न मचलो की
मनचलो के दिल मचले
इतना न फूलो की
अन्धकार घेर ले
वो, देखो निलाभ गगन
तुम्हे देख रहा है
तुम्हारे सुनहरे रुप को
पाखियो को लगा
जैसे रवि गगन से
उतरे हैं धरा पर।
* मनचलो से अर्थ है पृकृति प्रेमी।
परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं आप राष...

















