माँ के दर्द का अहसास है
प्रमेशदीप मानिकपुरी
भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़)
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एक लड़की जिसे माँ के दर्द का अहसास है
सामान्य सी दिखती लड़की, सब से खास है
दर्द में पली लड़की, जिसे दर्द का अहसास है
एक लड़की जिसे माँ के दर्द का अहसास है
उसकी सोच सामान्य लड़कीयों से भिन्न है
उसकी गम माँ के गम से सदैव अभिन्न है
जिसे माँ मे ही करनी, बाप की भी तलाश है
एक लड़की जिसे माँ के दर्द का अहसास है
उमड़ आते है गम के, आंसू आँखों में अक्सर
सोचती है क्या आयेगी कभी खुशी के अवसर
कितने गम है मगर, अभी भी जीने की आश है
एक लड़की जिसे माँ के दर्द का अहसास है
अजीब से सवाल उसके जहन में उठती है
जवाब के तलाश में, अपने आप से रूठती है
जवाब मिलने का, अब भी उसे आश है
एक लड़की जिसे माँ के दर्द का अहसास है
किसी के सब कुछ रहकर कुछ भी नहीं होता है
ऐसा अजीब इत्तेफाक दुनिया में क्यूंकर होता है
तब से अब तक हमें उसके उत्तर की...
























