निज उदर की सुवास खोजने
डॉ. सुलोचना शर्मा
बूंदी (राजस्थान)
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निज उदर की सुवास खोजने
जाने कितने मृग तड़पे होंगे
सुरीली सी ग़ज़ल कहने वाले
दर्द से कितनी बार मरे होंगे
जो चिराग हवाओं से ना डरे हैं
निस्सन्देह उन्ही से दूर अंधेरे होंगे
वो जो तूफानों में कश्ती डाले हैं
या हैं मजबूर या सिरफिरे होंगे
टिके हैं अंधेरों के सामने दीपक
सूरज तलक उन्हीं के चर्चे होंगे
तमस ने बेशक खुदकुशी की होगी
जहां जुगनू चमकते दिखे होंगे!!
परिचय :- डॉ. सुलोचना शर्मा
निवासी : बूंदी (राजस्थान)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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