आस्था और विश्वास
गीता देवी
औरैया (उत्तर प्रदेश)
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इस जगत की यह सच्चाई,
मिथ्या ना हो कोई आस।
हर रिश्ते की है मजबूती,
दो शब्द आस्था और विश्वास।।
सच्ची आस्था का यह सत्य,
न मानो अगर तो है पत्थर।
कर लिया दृढ़ विश्वास तो मानव,
निर्मित हो उठता है ईश्वर ।।
अटूट प्रेम की सुंदर आस्था,
एक पत्नी की पति के लिए।
जीवन भर बना रहता रिश्ता,
सच्ची विश्वसनीयता के लिए।।
गुणवान बिटिया करती आस्था,
जन्म देने वाले अपने पिता पर
भेज देते हैं लाडली को अपनी,
हेतु शिक्षा सिर्फ विश्वास पर।।
अबोध शिशु को भी है विश्वास,
रहता उसको अपने तात पर।
हवा में उछाले पुत्र को अपने,
आस्था अटूट पुत्र की पिता पर।
अभिभावक अपने बच्चों को,
छोड़ देते हैं आस्था के सहारे।
गुरु देंगे सुशिक्षित प्रगाढ़ ज्ञान,
दृढ़ विश्वास कभी ना हारे ।।
जीव के लिए ईश्वर ने ,
दो शब्द बनाए हैं अनमोल।
जिए सरलता से पृथ्वी पर ...
























