वक्त गुजर जाएगा
अख्तर अली शाह "अनन्त"
नीमच (मध्य प्रदेश)
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अब तक लाखों को रुला चुका,
अब नहीं रुलाने पाएगा,
वक्त गुजर जाएगा।।
चिंता की कोई बात नहीं,
हरदम रहती है रात नहीं।
क्या वक्त कहीं पे रुकता है,
क्या आता रोज प्रभात नहीं।।
डर जाएगा फिर क्यों तन मन,
क्यों नहीं प्रभाती गाएगा,
वक्त गुजर जाएगा।।
अब प्राणवायु उसके घर से,
आ पहुँची है रहमत बरसे।
अब कमी नही ऑक्सीजन की,
मन खुशियों से अब क्यों तरसे।।
खुशियों के आँसू आँखों में,
अब होंगे कौन रुलाएगा,
वक्त गुजर जाएगा।।
संक्रामित रोज बढ़े जाते,
विष कोरोना का फैलाते।
पर अब टीका मैदां में है,
हम देख रहे राहत पाते।।
"अनंत" कोरोना भागेगा,
विषधर कैसे डस जाएगा,
वक्त गुजर जाएगा।।
परिचय :- अख्तर अली शाह "अनन्त"
पिता : कासमशाह
जन्म : ११/०७/१९४७ (ग्यारह जुलाई सन् उन्नीस सौ सैंतालीस)
सम्प्रति : अधिवक्ता
पता : नीमच जिला- नीमच (मध्य प्रदेश)
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