नव निर्माण
सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
बलिया (उत्तरप्रदेश)
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ये मजबूत मेरी भुजाएं
जैसे पर्वत की शिलाएं
यह चौड़ी मेरी छाती
है जो भारत मां की थाती
यह मेरा दमकता उन्नत भाल
युद्ध भूमि में करता कमाल
मैं बागी बलिया से
मैं त्यागी बलिया से
मैं बागी बैरिया से
मैं हूं हिंद का जवान
मैं चाहता हूं करना कुछ महान
जिससे विकसित हो हिंदुस्तान
करके नव निर्माण
चला के कर्म का वाण
बना दूं शक्ति शाली हिंदुस्तान
उतार लाऊं आसमान
बनाऊं धरा को स्वर्ग समान।
परिचय :- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
निवासी : गुदरी सिंह के टोला, पांडे पुर, बैरिया, बलिया, (उत्तरप्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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