लंबी उम्र मिले भाई को
अंजनी कुमार चतुर्वेदी
निवाड़ी (मध्य प्रदेश)
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भाई बहन के मधुर प्यार का,
दूज पर्व है पावन।
जैसे बारिश में आता है,
रक्षाबंधन सावन।
भाई दूज कहाती है यह,
तिलक भाल पर लगता।
भाई -बहन का सघन प्यार ही,
अतुल नेह में पगता।
तिलक लगा आरती उतारें,
उसकी खैर मनायें।
भैया भाभी रहें प्यार से,
घर को स्वर्ग बनायें।
घर आँगन में खेलें बच्चे,
माता-पिता सुखी हों।
परिजन पुरिजन सारे रिश्ते,
फूलें सूर्यमुखी हों।
सजा आरती टीका करतीं,
खूब बलईंयाँ लेतीं।
खुशी रहे परिवार भाई का,
भर आशीषें देतीं।
दूज पूजकर सारी बहनें,
माथे तिलक लगातीं।
करें आरती स्वयं भाइ की,
मंगल थाल सजातीं।
लंबी उम्र मिले भाई को,
प्रभु से विनती करतीं।
हो पीहर खुशहाल हमारा,
मन उमंग से भरतीं।
दे उपहार भाइ,बहनों को,
आशीषें लेता है।
सारे जीवन भर रक्षा का,
वचन वही देता है।
भाई बहन का प्य...

















