कहो कैसे हुआ
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
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कहो कैसे हुआ यह सब,
मनुज का दिल ज़हर देखो।
हुए हैं क्रूर वे कितने,
ज़रा तो आचरण लेखो।
बचाना अब तो हमको बेटियाँ,
यह ही शपथ लें हम,
करें सब काम अब चोखा
व्यर्थ नारे नहीं फे़को।।
गर्भ में मारते क्योंकर,
जन्म लेने तो उनको।
वे हैं जननी, बहन-पत्नी,
शिकंजे में कसा जिनको।
नहीं पर ज़ुल्म का यह दौर,
आगे चल सकेगा अब,
ज़रा समझाओ, अब बदलो,
अपावनता भरे मन को।।
सुनो हर हाल में,
अब तो बचाना बेटियां हमको।
पुत्र ही होता है बेहतर,
बदलना आज मौसम को।
उठो नामर्द सारे चेतना
कुछ तो जगा लो अब,
बदलना ही बदलना है,
मलिनता, दर्द और ग़म को।।
न मारो गर्भ में कोमल कली को,
फूल बनने दो।
महकने दो, चहकने दो,
सुवासित होके खिलने दो।
न शोषण बेटियों का हो,
यही बस आज हो जाए,
जहाँ की हर खुशी, आनंद,
बेटी को तो मिलने दो।।
परि...

