एक साल की बैलेंस शीट
विजय गुप्ता "मुन्ना"
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो।
स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको।
एक छोर सम्मान प्रतिष्ठा में छाती चौड़ी होती है।
पर साजिश के अपमानों से, भारत माता रोती है।
द्वेष कलंकित दंश योजना धर्म पूछकर कत्ल करे।
खुला खेल फर्रुखाबादी धर्म विरोधी जहर भरे।
अनुभव सिंदूर बतला गया, बदला लेना झांकी है।
ताकत देश की पहचान लो, असला मसला बाकी है।
ड्रोन रॉकेट पिनाकी देख, शत्रु सांस अटकी देखो।
राफेल व्याख्या सफल यात्रा, देखदेख कर भी भटको।
एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो।
स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको।
एक छोर सम्मान प्रतिष्ठा में छाती चौड़ी होती है।
पर साजिश के अपमानों से, भारत माता रोती है।
नेता मंत्री संत जनों से, बिगड़ी बोली स्वाद चखा।
मांगी किसी ने कभी माफी, बोला कोई बोल यथा।
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