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सिर्फ सोलह लाइन में

राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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उसने सुझाव दिया कि
अपने दिल का
अरमान लिखो,
अपनी चाहत, शत्रु,
दिलोजान लिखो,
मैंने कहा यार सिर्फ
सोलह लाइन में
आप ही बताओ
क्या-क्या लिखूं,
अपनी मर्ज लिखूं
या दवा लिखूं,
अपने दोस्त लिखूं
या दुश्मन लिखूं,
या दोस्त के खोल में
छुपे स्वजन लिखूं,
मेरी उन्नति के लिए
उनका ढिंढोरा लिखूं,
या सच में उनका बहलाता
मन छिछोरा लिखूं,
अपनी आन बान
या शान लिखूं,
या मुझे बर्बाद करने का
उनका अरमां लिखूं,
समाज के लिए
जां लुटाना लिखूं,
या उनका स्वार्थ और
बरगलाना लिखूं,
अब दिल चीर कर
और कितना बताऊं,
सोलह लाइन में क्या
दिखाऊं क्या छुपाऊं।

परिचय :-  राजेन्द्र लाहिरी
निवासी : पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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