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नारी तुम

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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नारी तुम वंदनीय हो,
जीवन धन यंत्र हो,
सृष्टि के कपाल पर लिखा हुआ मंत्र हो,
ममता की खान हो, रिश्तों की आन हो1135
प्रकृति के माथे की बिंदिया की शान हो!!

दुर्गा हो, काली हो, लक्ष्मी और माँ हो
देवी के रूप मे विश्व मे पूजनीय हो!!

जीवन है कष्टकार, राहें पथरीली हैं
इतना सशक्त हो, अबला क्यों कहलाती हो??
पुरुष प्रधान देश मे आज भी परतंत्र हो
खुद के अस्तित्व को चिता पर क्यों सजाती हो??
सजग बनो, सचेत हो, सबल और समर्थ हो
निर्बल नहीं हो तुम, स्वयं में बलधारी हो!!

ना झुका सके तुम्हें कभी वो प्रचंड आसमान हो,
संघर्ष के चट्टानों का पूर्व होता आकाश हो!!

शिव का गुमान हो, कण-कण में विराजमान हो,
नारी ही नहीं जहान हो
प्रकृति के माथे की बिंदिया की शान हो!!

परिचय :- श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
पति : श्री राकेश कुमार चतुर्वेदी
जन्म : २७ जुलाई १९६५ वाराणसी
शिक्षा : एम. ए., एम.फिल – समाजशास्त्र, पी.जी.डिप्लोमा (मानवाधिकार)
निवासी : लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “जीवदया अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित
विशेष : साहित्यिक पुस्तकें पढ़ने के शौक ने लेखन की प्रेरणा दी और विगत ६-७ वर्षों से अपनी रचनाधर्मिता में संलग्न हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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