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कुछ स्त्रियां

शिवदत्त डोंगरे
पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
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कुछ स्त्रियों ने अक्सर
मौन को चुना
वो चिल्ला भी सकती थीं
वो दुनिया को अपनी परेशानी
बता भी सकती थी
वो अपनी आंखों में आंसू दिखाकर
लोगों के दिल में जगह बना
भी सकती थी
वो चाहती तो कर सकती थी
एक जंग का ऐलान फिर से
वो चाहती तो फिर कई युद्ध
करा भी सकती थी
वो चाहती तो छोड़ कर मान मर्यादा
समाज की धज्जियां उड़ा भी सकती थी
तोड़ कर भरम रिश्ते नातों का
वो निकल दहलीज से
बाहर जा भी सकती थी
वो चुन सकती थी ऐसी कई राहें
जहां उसकी मुश्किलें आसान हो जाती
जहां उसे किसी को
कोई जवाब देना अनिवार्य नहीं होता।

वो चाहती तो कर के भंग
घर की शांति को
कलह क्लेश से
घर का माहौल बिगाड़
भी सकती थी
मगर फिर भी उसने
मौन चुना, क्यों?
क्योंकि वो नहीं चाहती
युद्ध कोई
वो नहीं चाहती कि केवल
अपने मन की शांति के लिए
वो औरों की शांति को भंग करे
उसे नहीं चाहिए था
कोई ऐशो आराम
उसे बस सुकून की तलब थी।

मगर अपने सुकून
की तलाश में
वो कैसे अपने
आस पास वालों को
अनदेखा करती?
कायर नहीं होती हर वो स्त्री
जो चुप रह जाती है
बस वो अपने अलावा
सबका भला चाहती है।

परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक)
पिता : देवदत डोंगरे
जन्म : २० फरवरी
निवासी : पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “समाजसेवी अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित
घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है।


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