फिर भी चलते ही जाना है
विवेक नीमा
देवास (मध्य प्रदेश)
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संघर्षों की अमित कहानी
जीवन की सच्चाई है
पीड़ा और तंग हाली में भी
जिंदगी ने खुशियां पाई है।
कष्टों की परिभाषा क्या
सोचो और विचार करो
कठिन डगर पर भी तुम
थोड़ा सुकून तलाश करो
कितनों का घर तो देखो
खुला आसमान बसेरा है
सुख दुःख की क्या बात करें
जीवन में कष्ट घनेरा है।
फिर भी चलते ही जाना
नियति है यह कुदरत की
रुको नहीं तुम कर्म करो
बदलो रेखा किस्मत की।
परिचय : विवेक नीमा
निवासी : देवास (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बी कॉम, बी.ए, एम ए (जनसंचार), एम.ए. (हिंदी साहित्य), पी.जी.डी.एफ.एम
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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