दर्द मिटा दूँगा
डॉ. राजीव डोगरा "विमल"
कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
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तेरे दर्द को अल्फ़ाज़ दूंगा
मत सोच तू अकेला हैं
हर कदम पर तेरा साथ दूंगा।
दर्द का समुंदर जो तेरे अंदर
नित्य रफ़्ता-रफ़्ता बहता है
उसको भी एक दिन किनारा दूंगा।
जिस ख़ामोशी में समा रखा है
छटपटाता तूने दर्द अपना
उसको भी एक दिन आवाज़ दूंगा।
एक शमां जो तूने रौशना रखी है
खुद को ही मर मिटाने को
बुझा उसको एक दिन तुम्हें
अपने गले लगा लूंगा।
जो अश़्क बहाते हो तुम
चोरी-चोरी बैठे किसी कोने में
उनको पोंछकर तेरे चेहरे पर
जादू सी मुस्कराहट ला दूँगा।
परिचय :- डॉ. राजीव डोगरा "विमल"
निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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