मनुष्य बचा रहे
सुरेन्द्र कल्याण बुटाना
करनाल (हरियाणा)
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युद्धों से नहीं,
प्रेम से चलती है पृथ्वी।
तलवारें
सीमाएँ बना सकती हैं,
घर नहीं।
घृणा
भीड़ जुटा सकती है,
समाज नहीं।
मैंने देखा है-
एक सैनिक की माँ
सीमा के दोनों ओर
एक जैसी रोती है।
एक बच्चे का भय
किसी धर्म का नहीं होता।
एक भूखे मनुष्य की रोटी
किसी राष्ट्र की नहीं होती।
फिर हम क्यों
नामों, झंडों और दीवारों में
मनुष्य को बाँटते हैं?
समय की सबसे बड़ी आवश्यकता
नई विजय नहीं,
मनुष्य का बचा रहना है।
क्योंकि
यदि प्रेम हार गया,
तो जीतकर भी
हम हार जाएँगे।
परिचय :- सुरेन्द्र कल्याण बुटाना
जन्म : २१ जून १९९५
निवासी : ग्राम बुटाना, जिला जिला करनाल (हरियाणा)
प्रकाशित कृतियां : हिंदी कहानी पुस्तक "प्रतिज्ञा दोस्ताना (गज़ब दोस्ताना)", हरियाणवी कविता संग्रह "समाज"...



















