श्रृद्धांजलि
डॉ. जयलक्ष्मी विनायक
भोपाल (मध्य प्रदेश)
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जब कोई सिपाही होता है शहीद
मेरी आंखें होती हैं नम
एक आंसू टपक कर
बनता है अविरल धारा
शहादत की वो अपूर्व गाथा।
भले ही मेरा कुछ ना लगता हो वो
अनजाना सा अपरिचित,
फिर क्यों मेरे ज़हन में
उठती है इक मायूसी और टीस
बलिदान हमारे लिए देगया वीर।
छह महीने पहले जिसकी सधवा
बिलखती बन गई विधवा,
नैतृत्व करते अपनी टुकड़ी
तेलंगाना शूर हुआ शहीद बेहिचक
नन्ही बेटी जलाती है दीप
उसकी स्मृति में असमंजस।
वो बीस सिपाही दस्त-बदस्त लड़े
डंडे पत्थरों के ज़ख्मों से आहत,
गवां गए अपने प्राण,
कभी ना सोचा अपना स्वार्थ
जान हथेली पर ले तत्पर।
परिचय :- भोपाल (मध्य प्रदेश) निवासी डॉ. जयलक्ष्मी विनायक एक कवयित्री, गायिका और लेखिका हैं। स्कूलों व कालेजों में प्राध्यापिका रह चुकी हैं। २००३ में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर संगीत और साहित...





















