धरती करे पुकार
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
********************
जीवन भर गाते सभी, धरा मातु के गीत।
हरियाली को रोपकर, बन जाएँ सद् मीत।।
हरी-भरी धरती रहे, धरती करे पुकार।
तभी हवा की जीत है, कभी न होगी हार।।
हरियाली से सब सुखद, हो जीवन अभिराम।
पेड़ों से साँसें मिलें, धरा बने अभिराम।।
धरा सदा ही पालती, संतति हमको जान।
रखो धरा के हित सदा, बेहद ही सम्मान।।
धरा लुटाती नेह नित, वह करुणा का रूप।
उसकी पावन गोद में, सूरज जैसी धूप।।
धरा लिए संसार नित, बाँटे सुख हर हाल।
हवा, नीर, भोजन, दुआ, पा हम मालामाल।।
धरा-गोद में बैठकर, होते सभी निहाल।
मैदां, गिरि, जंगल सघन, सुख को करें बहाल।।
हरियाली के गीत नित, धरा गा रही ख़ूब।
हम सबको आनंद है, बिछी हुई है दूब।।
नित्य धरा-सौंदर्य लख, मन में जागे आस।
अंतर में उल्लास है, नित नेहिल अहसास।।
धरा सदा करुणामयी, बनी हुई वरदान।...










