होली … होली … होली …
लक्ष्मीकांत "कमलनयन"
सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश)
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होली होली होली आज हो ली प्रसन्न मन,
अगले बरस फिर प्यार बरसायेगी।
जीवन में रंग भर मन में उमंग नव,
नित ही तरंग ले बहार बन जायेगी।।
गायेगी मल्हार फिर जन गण मन हित,
रंग भंग संग बंधु गुझिया खिलायेगी।
"कमलनयन" आश,छाये नित मधुमास,
छंद बंद कवियों से गीत लिखवायेगी।।
परिचय :- लक्ष्मीकांत "कमलनयन"
निवासी : सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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