आंखे
सुरभि शुक्ला
इन्दौर (मध्य प्रदेश)
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कमाल
होती हैं आंखे
बिन बोले
सब कह देती हैं
दिल में छिपे सारे
राज़ खोल देती हैं
सच और झूठ
से पर्दा उठा कर
एक-एक रहस्य
उजागर करती हैं आंखे
क्या कहें
इनके बारे में
रोज नई कहानी
सुनाती हैं
हर किरदार का
नया रंग दिखाती हैं
ये, अपने और परायों की
असली पहचान
कराती हैं आंखे
जिनसे हम
अन्जान होते हैं
उन्ही किताबों के
पन्ने खोलती हैं
और एक नया
सबक सिखाती हैं
हर आदमी के
अध्याय को बार-बार
समझ कर पढ़ने को
कहती हैं आंखे
परिचय :- सुरभि शुक्ला
शिक्षा : एम.ए चित्रकला बी.लाइ. (पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान)
निवासी : इन्दौर (मध्य प्रदेश)
जन्म स्थान : कानपुर (उत्तर प्रदेश)
रूचि : लेखन, गायन, चित्रकला
सम्प्रति : निजी विद्यालय में पुस्तकालयाध्यक्ष
आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्...





















