कुछ लिखूं
श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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मन की लिखूं तो
शब्द रूठ से जाते हैं
और सच लिखूं तो अपने,
जिंदगी को समझना
चाहूँ तो सपने टूट जाते है
और हर घड़ी अपने
लिखू तो क्या लिखूं
अब ना अपने हैं
ना सपने
कुछ अजीब सा
चल रहा है ये अंतर्द्वंद
गहरी खामोशी है
खुद के अंदर
एक ऐसी जगह चाहिये
जहां खुद को भी
ना ढूँढ पाऊँ कभी
उड़ जाऊँ स्वच्छंद सी
किसी रोज़ इस जहां से
गुम ही जाऊँ
एक तिनका बन के
लहरों की गहराई में
छोड़ जाऊँ ना मिटने वाले
निशान सबके हृदय में
चढ़ जाऊँ किसी फूल की
पंखुडी बन श्री चरणों में
कभी ना मुरझाने का
आशीर्वाद लिए!!
परिचय :- श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
पति : श्री राकेश कुमार चतुर्वेदी
जन्म : २७ जुलाई १९६५ वाराणसी
शिक्षा : एम. ए., एम.फिल – समाजशास्त्र, पी.जी.डिप्लोमा (मानवाधिकार)
निवासी : लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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