मैं एक सिपाही हूं
शिवदत्त डोंगरे
पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
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मैं एक सिपाही हूं
सिपाही जो जीता है देश के लिए,
सिपाही जो मरता है देश के लिए,
सिपाही फिर भी गुमनाम हैं।
मैं एक सिपाही हूं
सिपाही जो एक शिक्षा हैं,
सिपाही जो एक प्रेरणा हैं,
देश पर न्यौछावर
होने के लिए,
फिर भी उसे स्थान
नहीं मिलता दिलों में,
इतिहास के पन्नों में
भी सिपाही का नाम नहीं,
रंगीन हो जीवन में
ऐसी कोई शाम नहीं।
मैं एक सिपाही हूं
मेरा नाम मिलेगा सरहद पर
दूर कहीं रेगिस्तानों में,
पहाड़ों में, बर्फीले तूफानों में,
अनजानी सी बारुद गोली में,
और मिलेगा नाम देश के
सुनहरे भविष्य की नींव में,
फिर भी सिपाही गुमनाम हैं ...
मैं एक सिपाही हूं
जिसकी कल तक
जय-जयकार थी,
तब देश को मेरी जरूरत थी,
आज मुझे भुला दिया है,
जब मुझे देश की जरूरत है,
कल तक कंधों पर मेरे देश की
सुरक्षा का भार...



