
सुषमा शुक्ला
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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हिंदी है दिल की धड़कन, मातृभूमि की शान,
इसके बिना सूना लगे, भारत का हर आँगन।
विश्व हिंदी दिवस लाया, नए रंग, नई बहार,
सुनो, जागो, बोलो इसे, बनाओ इसका सार।
सिंहावलोकन में यह, साहित्य की रोशनी,
कवियों की गूँज में, रचा है जीवन की धुन।
तुलसी, मीरा, सूर और रसखान की छवि,
हिंदी ने सजाई है, संस्कृति की अनूठी कुंजी।
शब्दों में है शक्ति, भावों में है जादू,
जिससे जुड़कर हर मन में खिलता सुख-सद्गुण का वसु।
भाषा सिर्फ शब्द नहीं, यह है आत्मा की छाया,
विश्व हिंदी दिवस पर इसकी करें हम गगन-गुंजाया।
स्कूल और कॉलेजों में गूंजे इसकी मधुर तान,
हिंदी के संग बच्चों का बढ़े ज्ञान।
जितनी भी दूरियाँ, मिटा देती यह भाषा,
एक करती मनुष्य को, बनाती जग में आशा।
आज हम सब करें प्रण, इसे रखें सजग, सशक्त,
हिंदी ही है वह दीप, जो जगमग करे सब पक्ष।
विश्व हिंदी दिवस पर करें हम इसका मान,
भाषा है हमारा गर्व, हमारी पहचान।
परिचय :- सुषमा शुक्ला
जन्म : २५ अप्रैल
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश्वविद्यालय
लेखन विधा : कविता, हायकु, पिरामिड, लघु कथा
लेखन : लेखन के क्षेत्र में कोविद में जीवनसाथी की प्रेरणा से लेखन का कार्य शुरू किया। धर्म और संस्कृति इन मंचों पर काव्य गोश्तियां संचालन किया मनपसंद हास्य कला साहित्य मंच पर कम से कम १२५ बार संचालन किया,, और चार बार अध्यक्ष पद प्राप्त किया। इन सभी संस्थाओं से अब तक कुल मिलाकर १२५ सम्मान पत्र प्राप्त हुए।
विशेष : नाइजीरिया में, लागोस शहर में हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार किया। अफ्रीका के आबिदजान शहर में हिंदी विश्व दिवस पर हिंदी के बावत भूषण और एक छोटी सी कविता पढ़ने का भारतीय दूतावास इंडियन एंबेसी में शुभ अवसर प्राप्त हुआ। तात्कालीन भारतीय राजदूत डॉक्टर राजेश रंजन के हाथों ससम्मान १०,००० सीफा राशि आबिदजान की मुद्रा, जिसे स्थानीय भाषा में सीफा कहा जाता है प्रदान की गई।
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