
चित्रलेखा व्यास
कानोड़, उदयपुर (राजस्थान)
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मैंने पूछा- “हिंदी! कहो,
क्या तुम्हें कभी
राष्ट्रभाषा कहा जाएगा?”
वह मुस्कुराई- “नहीं,
अभी तो मेरे हिस्से में बस
प्रतीक्षा का वनवास है।”
मैंने फिर पूछा-
“फिर तुम्हारा भविष्य क्या है,
कहाँ तक जाएगी तुम?”
बोली- “जहाँ तक
अपनी मिट्टी की गंध को
संजोए मनुष्य जाएगा,
मैं भी वहीं रहूँगी।”
संस्कृत की गोद से निकली,
प्राकृत की गलियों में पली,
अपभ्रंश की देहरी लाँघकर,
जन-जन की वाणी बनी,
कबीर की साखी और
तुलसी के मानस में ढलकर।
पर सत्ता के गलियारों में
पराई चमक ने जब अपना
सिंहासन सजाया,
तब अपने ही घर में
मुझे कभी-कभी मौन,
उपेक्षित और विस्मृत पाया।
मैंने पूछा- “हिंदी, तुम
बीच राह में कहाँ गुम हो गई थीं?”
वह बोली- “गुम नहीं हुई थी,
तुम्हारी ज़ुबानों पर
चुपचाप जीवित थी।”
“तुमने मुझे बाज़ार में छोड़ा,
शिक्षा में बाँटा,
प्रतिष्ठा के तराज़ू पर तोला,
फिर भी मैंने तुम्हारे आँसू,
तुम्हारे स्वप्न और तुम्हारे
गीतों को अपनी गोद में खोला।”
मैंने कहा- “तो चलो,
आज मैं तुमसे एक वादा करती हूँ
तुम्हें केवल भाषा नहीं,
अपना स्वाभिमान मानूँगी।”
हिंदी हँसी- “मुझे
राष्ट्रभाषा का नाम मिले न मिले,
बस तुम्हारे जीवन में सम्मान मिले
मैं फिर भी अमर रहूँगी।”
परिचय : चित्रलेखा व्यास
उपनाम : नीलचित्रा व्यास
जन्मतिथि : ११/०६/१९९६
पिता : मदन मोहन व्यास
माता : बन्नी देवी
पति : निलेश चौबीसा
स्थाई पता : कानोड़, उदयपुर (राजस्थान)
वर्तमान पता : प्रतापनगर, उदयपुर (राजस्थान)
शिक्षा : BCA कपासन (2015), M.A अंग्रेजी साहित्य (MLSU, Udaipur), B.A हिंदी साहित्य(MLSU, Udaipur), MCA जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड टेक्नोलॉजी, उदयपुर (राजस्थान) (2025)
प्रकाशित पुस्तकें : सहलेखिका- १ शब्दों का आसमान, २ भारत की बेटी, ३ सावन के झूले, तीज के गीत, ४ Mansoon, ५ sturmfier, ६ Trees of memory, ७ Scares&stars, ८ Soulprints of friendship, ९ Gardan of worlds, १० SUNBURNT ROSES.
सम्मान : राज श्री राष्ट्रीय वीर साहित्य वीर शिरोमणि सम्मान २०२६, राज श्री श्रीहरि भक्ति काव्य साहित्य रत्न सम्मान२०२६, विश्व हिंदी सृजन सागर मंच पाली, राजस्थान नवांकुर साहित्य सम्मान २०२६, विचार शिरोमणि सम्मान २०२६, विमला ज्ञान साहित्य मंच, गोण्डा उत्तरप्रदेश से तिरंगा साहित्य सम्मान
सृजन : मुख्यतः हिंदी एवं राजस्थानी (मेवाड़ी) भाषा में कविता, गीत, कहानी तथा लोकगीतों का सृजन।
विशेष अभिरुचि : गायन कला
काव्य गोष्ठी : राज श्री राष्ट्रीय साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं राष्ट्रीय काव्य गोष्ठियों में आमंत्रित कवयित्री के रूप में अपनी स्वरचित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी साहित्यिक उपस्थिति दर्ज कराई।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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