विधाता छंद
रामसाय श्रीवास "राम"
किरारी बाराद्वार (छत्तीसगढ़)
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मुक्तक
विधाता छंद
गजानन बुद्धि के दाता,
उमा शिव के बड़े प्यारे।
प्रथम हो पूज्य इस जग में,
तुम्हे पूजे जगत सारे।।
दरश को मैं चला आया,
सुमन भर भाव का लाया।
चरण में है नमन अर्पण,
इसे अब आप स्वीकारें।।
चतुर्थी है बड़ा पावन,
तिथि भादों की शुभकारी।
लिए अवतार हैं इस दिन,
छवि सुंदर है मनुहारी।।
बजे कैलाश में बाजे,
मनोहर रूप सब साजे।
खुशी की आज वेला है,
मनाते लोग हैं भारी।।
गगन से देवगण सारे,
देखकर खूब हर्षाऍ।
दरश की लालसा मन में,
लिए कैलाश में आऍ।।
गणों के हो तुम्हीं स्वामी,
प्रभु तुम हो अंतर्यामी।
विनय सुन लो हमारी भी,
तुम्हारे द्वार पर आऍ।।
परिचय :- रामसाय श्रीवास "राम"
निवासी : किरारी बाराद्वार, त.- सक्ती, जिला- जांजगीर चाम्पा (छत्तीसगढ़)
रूचि : गीत, कविता इत्यादि लेखन
घोषणा पत्र : मैं य...













