याद आते हैं वो दिन
अन्नू अस्थाना
भोपाल (मध्य प्रदेश)
********************
याद आते हैं वो दिन
जब पड़ोस में भाभी से
एक कटोरी शक्कर मांगना,
और बातों ही बातों में कहना
भाभी तनक सा दूध भी दे दीजो
जे आपिस (ऑफिस) से आने वाले हैं
चाह (चाय) बनानी थी भाभी
फिर भाभी का स्नेह से कहना,
अरि जा मैं चाय बना लाती हूं
तू चीनी लेती जा बहन।
"याद आते हैं वो दिन"
याद आते हैं अड़ोस-पड़ोस में
बतियाने वाले दिन।
अड़ोस-पड़ोस कुछ नहीं होता था,
बस भैया-भाभी चाचा-चाची
जैसे रिश्तो का नाता था
बस यूं ही पूछ लिया करते थे
और भौजी कैसी हो, सब ठीक है
चाचा-चाची आप कैसे हो।
"याद आते हैं वो पूछ
परख करने वाले दिन"
हमारी सुबह की शुरुवात
भाई साहब के अखबार
से हुआ करती थी,
एक नमस्कार
सौ चमत्कार किया करते थे,
रुपए, दो रुपए का अखबार
हम भी खरीद सकते थे,
पर पड़ोस वाले भाई साहब से
स्नेह कुछ ऐसा ही था
हम पू...

























