कान्हा स्वामी
मीना भट्ट "सिद्धार्थ"
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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मन्दाक्रान्ता
विधान : वार्णिक छंद
गण संयोजन
मगण भगण नगण तगण तगण गुरु गुरु
२२२ २११ १११ २२१ २२१ २२
१७ वर्ण प्रति चरण ४, ६, ७ वर्णों पर यति
४ चरण, दो दो चरण समतुकांत
कान्हा स्वामी, नमन करिए, भावना नित्य बोले।
वंशी देखो, बजत प्रभु की, राधिका मुग्ध डोले।।
संगी ग्वाला, सुमिरत सुनो, श्याम प्यारे उबारो।
राधा ध्यावे, नटवर सदा, नाम कान्हा पुकारो।
राधे रानी, नित किशन का, नाम जापें विधाता।
झूमें गोपी, नटवर कहें, आप हो श्याम दाता।।
मीरा प्यारे, मनहर प्रभो, नाथ प्यारे नमामी।
साँसो में भी, गिरधर रहो, आज आभार स्वामी।।
नैया मेरी, भँवर फँसती, पार हो हे खिवैया।
आई हूँ मैं, चरनन पड़ी, द्वार तेरे कन्हैया।।
तारो कान्हा, प्रतिपल कहें, हो कृपा भी सहारे।
कृष्णा कृष्णा, निशदिन रटूँ, हो दया क्यों बिसारे।।
नैनो में हो...















