मन खुशी से झूम उठा
रामसाय श्रीवास "राम"
किरारी बाराद्वार (छत्तीसगढ़)
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लावड़ी छंद
आज खुशी से झूम उठा मन,
कुदरत की है देख छटा।
शीत गुलाबी लगी कॅंपाने,
अम्बर में है तेज घटा।।
बिन बरसात बरसता बादल,
चली हवा है पुरवाई।
मौसम के इस परिवर्तन से,
हुई सभी को कठिनाई।।
चिंतित हैं हलधर बेचारे,
अन्न अभी है पड़ा कटा
आज खुशी से झूम उठा मन,
कुदरत की है देख छटा
द्वार खड़ा ऋतुराज अभी है,
आने को दस्तक देता।
पुष्प बांण से वेध हृदय का,
सारे संकट हर लेता।।
करें प्रतीक्षा गुलशन सारे,
उसमें सब का ध्यान बॅंटा
आज खुशी से झूम उठा मन,
कुदरत की है देख छटा
नाच रहा मन मोर हृदय में,
कैसी यह शुभ बेला है।
खेत और खलिहान भरे हैं,
ज्यों खुशियों का मेला है।।
लाभ किसी को हुआ अधिक है,
और किसी का तनिक घटा
आज खुशी से झूम उठा मन,
कुदरत की है देख छटा
अद्भुत है ईश्वर की लीला,
देख चकित सब होते ...











