दुनिया देखे नाही
जयप्रकाश शर्मा
जोधपुर (राजस्थान)
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बुद्धि ये कहती है
सयानों से मिलकर रहना
हदय ये कहता है
दीवानों से मिलकर रहना
अपने टिकने नहीं देते हैं
कभी चोटी पर
जान-पहचान अनजानों
से बनाए रखना
अब आसान नहीं है
उसे रोक के रखना
वह मृत्यु है किसी की
नहीं सुनती
कस्तूरी कुंडल बसै,
मृग ढूढै वन मांहि..
ऐसे घट घट राम हैं,
दुनिया देखे नांहि..!
परिचय :- जयप्रकाश शर्मा
निवासी : जोधपुर (राजस्थान)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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