मजदूर हैं हम
होशियार सिंह यादव
महेंद्रगढ़ हरियाणा
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मजदूर हैं, मजदूरी देना,
बहुत दुख दर्द सहते हैं,
दिनरात काम ही काम,
मजदूर लोग यूं कहते हैं।
तन पर कपड़े फटे हुए,
खाने को नहीं दो रोटी,
हाय गरीबी मजदूर की,
कैसी किस्मत है खोटी।
कई दिन भूखे प्यासे रहे,
फिर नहीं मिलता काम,
भूख प्यास मिटा लेते हैं,
बस लेकर प्रभु का नाम।
मजदूर की मजदूरी देख,
आंखें भी हो जाएंगी नम,
प्रभु की माया निराली है,
कितना दिया उनको गम।
धनवान के घरों में सदा,
मजदूर करते हैं मजदूरी,
अपने सगे संबंधियों से,
बनाए रखते सदा ही दूरी।
भूखे प्यासे उनके बच्चे,
हाथ पसारने से डरते हैं,
दवा अभाव में कभी तो,
सड़कों किनारे मरते हैं।
कोई ना सुने मजदूर की,
गरीब बेचारे ये सारे है,
प्रभु की नजरों में तो ये,
आंखों के कहाते तारे हैं।
कभी ना बनाना मजदूर,
तरस खा कुछ भगवान्,
इनका घर धन से भरो,
जीने की बढ़ जाए शान।
फटे हाल रहते मजद...
























