मौत की खुशबू
कु. आरती सिरसाट
बुरहानपुर (मध्यप्रदेश)
********************
प्रकृति ने ओर इक बार
दहाड़ लगायीं है....!
विकराल रूप लेकर,
मौत की खुशबू पवन में फिर से छायीं है....!!
न अस्पताल में जगह है,
न शमशान में जगह है....!
सब तेरा ही तो किया धराया है,
तूँ ही तो इस महामारी की वजह है....!!
तेरी औकात तुझे क्यों
समझ में नहीं आती है ये इंसान....!
कभी तूँ माटी पर तो, कभी माटी तेरे ऊपर,
बस इतनी सी तो है तेरी पहचान....!!
किस बात का अलंकार
तुझ पर छाया है....!
दौलत, शोहरत ये तो
एक तेरे मन की मोह माया है....!!
बोल अपने तूँ अनमोल रख
यहीं तो जीवन की सच्ची कमाई है....!
प्राणी मात्र पर दया करना सिख ले
इसी में तेरी भलाई है....!!
परिचय :- कु. आरती सुधाकर सिरसाट
निवासी : ग्राम गुलई, बुरहानपुर (मध्यप्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
आप भी अपनी क...
























