हिन्दी पर दो मुक्तक
डॉ. कोशी सिन्हा
अलीगंज (लखनऊ)
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हिन्दी तन मन है, हिन्दी है प्राण
यही है अपंनी भाषा, यही पहचान
हिन्दी के गुण गाकर, शीश चढायें
बोल कर हिन्दी, बढायें अपना मान
अनुदित हो हिन्दी, बढाती निज की आन
गा कर रम कर, समृद्ध करें इसका गान
इसकी महिमा को हृदय में रखें सदा
बोलें सब मिल, जय हिन्दी जय हिन्दुस्तान
परिचय :- डॉ. कोशी सिन्हा
पूरा नाम : डॉ. कौशलेश कुमारी सिन्हा
निवासी : अलीगंज लखनऊ
शिक्षा : एम.ए.,पी एच डी, बी.एड., स्नातक कक्षा और उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापन
साहित्य सेवा : दूरदर्शन एवं आकाशवाणी में काव्य पाठ, विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में गद्य, पद्य विधा में लेखन,
प्रकाशित पुस्तक : "अस्माकं संस्कृति," (संस्कृत भाषा में)
सम्मान : नव सृजन संस्था द्वारा "हिन्दी रत्न" सम्मान से सम्मानित, मुक्तक लोक द्वारा चित्र मंथन सृजन सम्मान, महात्मा गाँधी शांति स...











