हे! जगन्नाथ जी
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
********************
हे! जगन्नाथ जी सब पे कृपा करो।
मांगलिक शुभ पलों को सदा ही झरो।
जो भी अवगुण लिए है, मनुज अब यहाँ,
उनको इस जग के स्वामी, अभी ही हरो।।
हैं उड़ीसा में स्वामी जगन्नाथ जी।
जिनकी रथयात्रा धर्म के साथ जी।
संग में हैं बहन और बड़े भ्रातृ भी,
तीनों करुणा जगतहित लिए हाथ जी।।
कितनी पावन घड़ी पल्लवित हो रही।
रथ की शुभयात्रा, चेतना वो रही।
जो मलिनता जगत में हुई व्याप्त है,
उसको देवों की महिमा सदा धो रही।।
पाप कटने लगा, श्राप हटने लगा।
धर्म बढ़ने लगा, सत्य पलने लगा।
आज रथयात्रा का हुआ योग है,
इस धरा पर परमताप खिलने लगा।।
परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
जन्म : २५-०९-१९६१
निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), एल.एल.बी, पी-एच.डी. (इतिहास)
सम्प्रति : प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष इतिहास...











