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Tag: इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”

मेरी पसंद
कविता

मेरी पसंद

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** माता दुर्गा की पूजा की श्री राम ने, वह तट पसंद है, माता सीता ने वनवास काटा, वह पंचवटी पसंद है। हनुमाना ने लंका की उजाड़ी, वह वाटिका पसंद है, राम-सीते का मिलन हुआ, वह वाटिका पसंद है। लव-कुश का जन्मोत्सव हुआ, वह आश्रम पसंद है, रामकृष्ण परमहंस ने ज्ञान दिया, वह आश्रम पसंद है। मीरा की भक्ति से पावन हुई, वह धरती पसंद है, कृष्ण ने गोपियों संग लीला की, वह धरती पसंद है। तुलसी ने रामचरित रची, वह गंगा तट पसंद है, श्रीराम ने जलसमाधि ली, वह सरयू घाट पसंद है। कपिश्वर लाए संजीवनी, वह पाषाण पसंद है, कृष्ण ने रक्षा हेतु उठाया, वह गोवर्धन पाषाण पसंद है। जिस रज पर जीवन संभव, वह धरती पसंद है, जिस रज पर मैं चरण रखूँ, वह अपनी धरती पसंद है। परिचय :-  इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" उपनाम : "नोहरी" ...
धीरे-धीरे हँसना प्रिये …
कविता

धीरे-धीरे हँसना प्रिये …

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** धीरे-धीरे हँसना प्रिये, मेरा मुझसे ही कहना प्रिये। सोणी-सोणी है मेरी नार, सच्चा-सच्चा है तेरा मेरा प्यार।। तुझको मेरे पास रहना है, सच्चा साथ निभाना है। धीर धारण करके रहना है, मुझे महकाते रहना है। मुझसे ही है तेरा श्रृंगार, मेरे बिना श्रृंगार है बेकार। धीरे-धीरे हँसना प्रिये, मेरा मुझसे ही कहना प्रिये। सोणी-सोणी है मेरी नार, सच्चा-सच्चा है तेरा मेरा प्यार।। रातें काली-काली होती हैं, फिर भी सुंदर सुबह होती हैं। रातों में मीठी-मीठी बातें होती हैं, मगर अधूरी रह जाती हैं। मेरी परछाई बनना प्रिये, मरने से पहले साथ रहना प्रिये। इस जीवन में मेरी हो प्रिये, फिर कहना मेरा ये ही है प्यार। सबको सच्च कहना, इसको ही कहते है सच्चा दिलदार। धीरे-धीरे हँसना प्रिये, मेरा मुझसे ही कहना प्रिये। स...
नमन उन शहीदों को …
कविता

नमन उन शहीदों को …

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** भारत आजाद कराने, दीवानों की वो टोली चली थी, आजादी की किताबों से, हमने बस सुनी कहानी थी। न जाने कितने परवानों ने, सीने पर खाई गोली थी, मन में अडिग संकल्प लिए, उन्होंने ही क्रांति जगाई थी। इतिहास के पन्नों में पढ़ लेना, आजादी जिनकी दीवानी थी, आजादी की किताबों से, हमने बस सुनी कहानी थी। माँ भारती की मुक्ति को, वीरों ने हँसकर कुर्बानी दी थी, कोई कैसे कह दे हमको, केवल अहिंसा से आजादी मिली थी? हाँ यह भी पढ़ना, कितनी 'लक्ष्मी' रणचंडी बन लड़ी थीं, आजादी की किताबों से, हमने बस सुनी कहानी थी। स्वातंत्र्य-यज्ञ की वेदी पर, कितनी ही माँओं की गोद सूनी थी, न जाने कितनी बहनों ने, अपनी राखी वाली कलाई खोई थी। खदेड़ दिया फिरंगियों को, जमकर धूल चटाई थी, आजादी की किताबों से, हमने बस सुनी कहानी थी। जह...
नोहर की बदलती आबोहवा
कविता

नोहर की बदलती आबोहवा

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** भूल गए बिहानी का वैभव, भूला वो सम्मान यहाँ, भगतसिंह के नाम पे सिसक रहा ईमान यहाँ। परशुराम चौक की गरिमा, अब धुएं में खोई है, नोहर की ये पावन माटी, आज अकेले रोई है। वो गोल गटा कुआं जहाँ, जुटती थी टोलियां कभी, आज वहां सट्टे की लत ने, छीनी सबकी खुशियां सभी। शिवाजी स्टैंड की चौखट पर, कैसा ये मंजर आया है, नोहर की गलियों के साये में, डोडों का व्यापार समाया है। न लाज रही बुजुर्गों की, न खौफ रहा अब शासन का, हर नुक्कड़ पर खेल चल रहा, नशीले उस राशन का। जहाँ गूंजते थे नारे आज़ादी और क्रांति के, वहां सौदा हो रहा है आज, समाज की शांति के। घर की दहलीज लांघ कर, अब नारी भी कदम बढ़ाती है, चंद रुपयों की खातिर वो, ज़हर घरों तक लाती है। मैली हवा में हाथ धोना, अब दस्तूर बन गया, जो शहर कभी था हीरा, वो आज नासूर...
यूँ कागज पर लिखने से क्या फ़ायदा
कविता

यूँ कागज पर लिखने से क्या फ़ायदा

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** यूँ कागज पर लिखने से क्या फायदा, बरसात में भीग जाएगा बचेगा नहीं, तुमने पत्थर सा दिल कह तो दिया, पत्थर पर लिखोगे तो मिटेगा नहीं। मैं तो दसतपा था फिर क्यों बुलाया, तन पर मधुमास लपेटे हुए, शरद की शीत में कमल मुरझाया, प्यास तन में लिए हुए। तुमने मुँह छिपाया तो ऐसा लगा, अब सूरज उगेगा नहीं.... यूँ कागज पर लिखने से क्या फायदा, बरसात में भीग जाएगा बचेगा नहीं। मैं बसंत की तीज मना लुँगा, तुम्हें कौन ऋतु बसंती बताएगा। तुम अपनी धरोहर तो दिखा, तुम्हारी धरोहर दिल में बसा लुँगा, यूँ नयनों में नयन मत डालना, फिर ये दिल किसी की मानेगा नहीं। यूं कागज़ पर लिखने से क्या फायदा, बरसात में भीग जाएगा बचेगा नहीं, तुमने पत्थर सा दिल कह तो दिया, पत्थर पर लिखोगे तो मिटेगा नहीं। आँख बंद की तो तुम लैला सी ...
हम राजस्थानी
कविता

हम राजस्थानी

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** हम सबसे सच्चे सबसे अच्छे वो राजस्थानी हैं, हम गोगानवमी को गोगामेड़ी में जाकर बजाते टन्नी हैं। हम देवनारायण जी की फड़ सबसे लम्बी बताते हैं, हम पाबूजी की फड़ सबसे छोटी पढ़ाते हैं। हम रामदेव जी के रामदेवरा में धोक लगातें हैं, हम उस तेजाजी की लीलण सी धूम मचाते हैं। हम करणी माता के वो सफेद काबा कहलाते हैं , हम जीण माता का सबसे लम्बा गीत गाते हैं। हम शीतला माता के बास्योङा का भोग लगाते हैं, हम उस सुगाली माता के वंशज हैं जिसको क्रांति का योग बताते हैं। हम उस खाटूश्याम के सेवक हैं जो शिश के दानी हैं, हम सबसे सच्चे सबसे अच्छे वो राजस्थानी हैं। हम उस हल्दी घाटी की मिट्टी से तिलक सजाते हैं, हम दुश्मन को सूरजमल सी झलक दिखलाते हैं। हम राव जोधा के जोधपुर को बसाने वाले हैं, हम सबको पुष्कर झील दिखाने वाल...
मेङ पर बैठा संगिनी साथ
कविता

मेङ पर बैठा संगिनी साथ

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** देखा भी तो क्या देखा अगर देखा नहीं गोरखाना। देखता हुं दृश्य अब जब मैं मेङ पर खेत की बैठा संगिनी साथ। यह हरा ठिगना मौठ बांधे मुरैठा रंगिन शीश पर, फूलों से सजकर खङा हैं। देखा भी तो क्या देखा, अगर देखा नहीं गोरखाना। बीच में बाजरी हठिली देह पतली, कमर लचीली बांध शीश पर चांदी मुकुट लहर-लहर लहराव है देखा भी तो क्या देखा अगर देखा नहीं गोरखाना। और ग्वार की न पूछो, सबसे अलग अकङ दिखावै। हरे पत्तों से लदा फंदा हैं हरे पन्ने सी फली चमकावै है। प्रकृति अनुराग रस बरसावै है। देखा भी तो क्या देखा अगर देखा नहीं गोरखाना।। परिचय :-  इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" उपनाम : "नोहरी" पिताजी का नाम : श्री भानीराम सिहाग माताजी का नाम : कांता देवी अर्धांगिनी का नाम : माया देवी जन्म दिनांक : १३/०७/१९९...
गुरुओं का आभार
कविता

गुरुओं का आभार

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** गुरु क्या होते हैं सबको आज बताने आया हूं, मैं सभी गुरुओं का आभार जताने आया हूं। अगर गुरु वशिष्ठ ना होते तो शायद राम श्री राम ना होते, अगर गुरु सन्दीपन ना होते तो शायद कृष्ण घनश्याम ना होते। गुरु द्रोणाचार्य बिन कोई कैसे अर्जुन बन सकता है, गुरु रमाकांत आचरेकर बिन कोई कैसे सचीन बन सकता है। गुरु नरहरिदास बिन कोई कैसे सगुण का पाठ पढ़ा सकता, गुरु रामानन्द बिन कोई कैसे निर्गुण का पाठ पढ़ा सकता है। गुरु गोखले ने गांधी जैसा उज्ज्वल भविष्य दिया, गुरु रामावतार, बलवंत ने आपको नादान बालक दिया।। गुरु क्या होते हैं सबको आज बताने आया हूं, मैं सभी गुरुओं का आभार जताने आया हूं। परिचय :-  इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" उपनाम : "नोहरी" पिताजी का नाम : श्री भानीराम सिहाग माताजी का नाम :...
गौमाता की पुकार
कविता

गौमाता की पुकार

इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" गोरखाना, नोहर (राजस्थान) ******************** गाय गुणो की खान है, जाने जानन हार। अमृत समान दुध मिलता, सबकाबेङा पार। औ मूरली वाले सुणले अब पुकार, तेरे बिना मरु में अब तो लेले अवतार।। आपकी गईयो के क्या हो गया कन्हैया, हर एक के बदन पर हो गया गंठिया। पीङा, क्रंदन को सहते रोज जाती बैकुंठ , आंसू टेरती पुकारती कहां छुप गया कन्हैया।। इन गईयों ने कब किसी को दर्द दिया , जग में यूं नहीं कहलाई कामधेनु गईया । जग जीवन को नवजात की तरह पाला , आपकी गईया पुकारती है कृष्ण कन्हैया।। परिचय :-  इंद्रजीत सिहाग "नोहरी" उपनाम : "नोहरी" पिताजी का नाम : श्री भानीराम सिहाग माताजी का नाम : कांता देवी अर्धांगिनी का नाम : माया देवी जन्म दिनांक : १३/०७/१९९१ सम्प्रति : शिक्षक शिक्षा : दो बार स्नातकोत्तर, बीएड निवासी : गोरखाना तहसील नोहर ज़िला-...