मरुधरा रा मान-धणी
इंद्रजीत सिहाग "नोहरी"
गोरखाना, नोहर (राजस्थान)
********************
(राजस्थानी भाषा)
जेता-कूंपा री तलवार घणै, थर-थर कांपै बैरी सारा,
मालदेव रा दाह्या-बायां, गूंज्या रण में जकां रा नारा।
मारवाड़ री माटी रा वे, मान-बढावण हार,
रण में जुंझार बण'र लाड्या, धरम रा राखां धार।
चित्तौड़गढ़ रो ऊंचो धज, गौर-बादल री ओळखांण,
रतन सिंह रा अंगरक्षक, राख्यो कुल-मर्यादा रो मांण।
केसरिया बाना पेर'र वे, रण-खेत में कीनो प्रवेश,
छाती ठोक'र मिटा दियो, दुश्मन रो अळगौ भेष।
उदय सिंह रा ओजस्वी वे, जयमल-फत्ता अणखिला,
चित्तौड़ री प्राचीर माथै, सावळ बण'र उभा खिला।
धड़ लड्या अर शीश कड्या, पर पग पाचो नी दियो,
वीरता री ओ मूंछ्याळी गाथा, इतिहास माथै लिख दियो।
महोबा रा आन-बाण, आल्हा-ऊदल रो प्रताप,
रण-भेरी बाज्या पछै, दुश्मन पावै घणो संताप।
पृथ्वीराज सूं भिड्या रण में, ओ तो अजब खेल दिखाय...

